गुना का पंचमुखी पंचकल्याणक रचेगा इतिहास, विश्व का पहला अद्भुत, अकल्पनीय और ऐतिहासिक होगा आयोजन
देश में पहली बार दिखेगा अनूठा दृश्य, जैन धर्म के इतिहास में हर प्रमुख पात्र की संख्या होगी पांच-पांच
गुना। अनंत न्यूज़
गुना जिले में जैन धर्म के इतिहास का एक ऐसा स्वर्णिम अध्याय लिखे जाने की तैयारी हो रही है, जो न केवल देश बल्कि पूरे विश्व में मिसाल बनेगा। संत शिरोमणि आचार्य गुरुवर श्री विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने शनिवार को गुना में आयोजित भव्य धर्मसभा के दौरान श्रद्धालुओं को मंगल आशीष देते हुए इस ऐतिहासिक आयोजन की घोषणा की।
मुनिश्री ने अत्यंत हर्ष के साथ कहा कि गुना की धरा पर होने जा रहा 'पंचमुखी पंचकल्याणक' महामहोत्सव बेहद अलौकिक, विशेष और अकल्पनीय होने वाला है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज तक देश के कोने-कोने में हजारों पंचकल्याणक महोत्सव आयोजित हुए होंगे, लेकिन गुना का यह आयोजन एक नया और अमिट इतिहास रचेगा, जिसके साक्षी यहां के समस्त श्रद्धालु बनेंगे। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए पंचमुखी रुद्राक्ष के विशेष आध्यात्मिक महत्व और उसकी दुर्लभता का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पंचमुखी रुद्राक्ष को अत्यंत पवित्र और चमत्कारी माना जाता है, ठीक उसी तरह गुना की पावन भूमि पर आयोजित होने वाला यह पंचमुखी पंचकल्याणक भी अद्वितीय और ऐतिहासिक सिद्ध होगा। इस महामहोत्सव की सबसे बड़ी और अभूतपूर्व खासियत यह होगी कि इसमें जैन शास्त्रों और परंपराओं के अनुसार बनने वाले सभी प्रमुख पात्रों की संख्या पांच-पांच रखी जाएगी। यह जैन समाज के इतिहास में संभवत: पहला ऐसा आयोजन होगा जहां एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मुख्य पात्रों की प्रतिष्ठा की जाएगी। इस अनूठे पंचकल्याणक की रूपरेखा साझा करते हुए मुनिश्री ने बताया कि महोत्सव में पांच सौधर्म इंद्र होंगे। इसके साथ ही पांच कुबेर, पांच यज्ञ नायक, पांच ईशान इंद्र और पांच सनत कुमार इंद्र भी पांडाल की शोभा बढ़ाएंगे। सबसे खास बात यह है कि भगवान के माता-पिता बनने का परम सौभाग्य भी किसी एक जोड़े को नहीं, बल्कि पांच अलग-अलग भाग्यशाली जोड़ों को प्राप्त होगा। इतना ही नहीं, वैराग्य की भावना को प्रदर्शित करने वाले दृश्यों में भी भव्यता पांच गुना होगी। महोत्सव के दौरान पांच भव्य नीलांजना नृत्य आयोजित होंगे, पांच दीक्षाएं संपन्न कराई जाएंगी और पांच ही अद्वितीय आहार के दृश्य जीवंत किए जाएंगे, जो उपस्थित जनसमुदाय को भावविभोर कर देंगे। इस ऐतिहासिक 'पंचमुखी पंचकल्याणक' महामहोत्सव की सूक्ष्म और विस्तृत रूपरेखा तैयार करने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। आगामी दिनों में बजरंग कमेटी के अध्यक्ष एस. के. जैन एवं मानसेवी मंत्री प्रदीप जैन, सुप्रसिद्ध पंचकल्याणक प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया के साथ सामूहिक रूप से एक पत्रकार वार्ता आयोजित करेंगे, जिसमें इस भव्य विश्वस्तरीय धार्मिक आयोजन की तिथियों, व्यवस्थाओं और विस्तृत कार्यक्रमों की आधिकारिक घोषणा आम जनता और श्रद्धालुओं के लिए जारी की जाएगी।
मुनिश्री बोले-माला जपें और नियमित मंत्र जाप करें
मुनिश्री ने इस आयोजन की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल गुना नगर या अंचल का नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष और विश्व का कल्याण करने वाला महामहोत्सव सिद्ध होगा। इस दौरान देश के विभिन्न अंचलों से आईं सैकड़ों प्राचीन व नवीन जिन-प्रतिमाओं को सूर्य मंत्र देकर उनकी प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी, जिससे वे पूजनीय और वंदनीय बनेंगी। मुनिश्री ने इस महामहोत्सव की निर्विघ्न सफलता के लिए अभी से सभी श्रद्धालुओं को भगवान की माला जपने और नियमित रूप से विशेष मंत्र जाप शुरू करने का आह्वान किया।
श्रद्धालुओं को पढ़ाया धैर्य का पाठ
अपने सारगर्भित प्रवचनों के दौरान मुनिश्री ने चातक (पपीहा) पक्षी का बेहद मर्मस्पर्शी और ज्ञानवर्धक उदाहरण दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं को धैर्य का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि पपीहा पक्षी परम धैर्यवान होता है और वह सालभर केवल स्वाति नक्षत्र की बारिश की बूंदों का इंतजार करता है। वह चाहे प्यास से तड़पकर मरने की स्थिति में क्यों न आ जाए, लेकिन कभी भी नदी, तालाब, कुएं या अन्य किसी जल स्रोत में अपनी चोंच नहीं डुबोता। यदि स्वाति नक्षत्र बिन बरसे चला जाए, तो वह पूरा साल बिना पानी के गुजार देता है। मुनिश्री ने कहा कि इसी प्रकार श्रद्धालुओं को भी धर्म और भक्ति के प्रति अडिग, निष्ठावान और धैर्यवान होना चाहिए, ताकि इस महामहोत्सव का पुण्य फल उन्हें प्राप्त हो सके। उन्होंने आयोजकों से भी कहा कि इस भव्य धार्मिक समागम में आने वाला कोई भी श्रद्धालु व्यवस्थाओं की कमी के कारण प्यासा या अतृप्त न लौटे।
देश-प्रदेश से पहुंच रहे हैं श्रद्धालु
मीडिया प्रभारी विकास जैन नखराली ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्यापक श्रमण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के गुना आगमन को लेकर पूरे अंचल और जैन समाज में अभूतपूर्व उत्साह, हर्ष और भक्ति का माहौल व्याप्त है। पूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद और पावन सानिध्य प्राप्त करने के लिए देश के कई राज्यों से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु और वीआईपी गुना पहुंच रहे हैं। गुना की धरा पर हर दिन विभिन्न समाजों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संस्थाओं द्वारा मुनिश्री की भव्य अगवानी की जा रही है, और उनके पाद प्रक्षालन कर मंगल आशीर्वाद लेने का क्रम निरंतर जारी है।