सूदखोर की धोखाधड़ी और बेटी के ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर युवक ने की खुदकुशी

बेटी को पुत्री होने पर ससुराल वालों ने निकाला, तो दूसरी तरफ गिरवी रखी चांदी हड़प रहा था कथित डॉक्टर

सूदखोर की धोखाधड़ी और बेटी के ससुराल वालों की प्रताड़ना से तंग आकर युवक ने की खुदकुशी
अस्पताल में मौत से पहले बनाया था वीडियो।

गुना। दयालवाणी

जिले के सिरसी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम तिलवाड़ा से समाज की संवेदनहीनता और प्रशासनिक लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। दहेज लोभियों के मानसिक उत्पीड़न और एक कथित डॉक्टर की सूदखोरी व वादाखिलाफी से तंग आकर 38 वर्षीय मनोज राठौर ने जहर (सल्फास) खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मौत से पहले बनाए गए वायरल वीडियो और परिजनों के बयानों ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृतक के परिजनों ने बताया कि मनोज राठौर की बेटी खुशबू का विवाह लगभग दो वर्ष पूर्व हुआ था। शादी में मनोज ने अपनी हैसियत से बढ़कर उपहार दिए थे, जिसके लिए उन्होंने अपने जेवर तक गिरवी रख दिए थे। इसके बावजूद दामाद और उसके परिजन लगातार दहेज को लेकर खुशबू को प्रताड़ित कर रहे थे। हाल ही में खुशबू ने एक बच्ची (पुत्री) को जन्म दिया। बेटा न होने की कुत्सित मानसिकता के चलते ससुराल पक्ष उग्र हो गया और 8 दिन पहले नवजात शिशु व खुशबू को बेदखल कर दिया। लाडली बेटी का भविष्य अंधकार में देखकर और दामाद की बेरुखी से मनोज पूरी तरह टूट चुके थे।

सूदखोर डॉक्टर द्वारा चांदी हड़पना और पुलिस की हीलाहवाली

मामले का दूसरा पहलू मारकी महू क्षेत्र में सक्रिय ब्याजखोरी से जुड़ा है। मनोज ने दो साल पहले अपनी 960 ग्राम चांदी डॉक्टर दारा सिंह धाकड़ के पास 20 हजार में गिरवी रखी थी। एक साल पहले ही मनोज ने ब्याज सहित 25 हजार चुका दिए थे, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर द्वारा उसकी चांदी नहीं लौटाई गई। लगातार चक्कर काटने से परेशान होकर मनोज ने 18 जुलाई 2026 को सिरसी थाने में लिखित शिकायत दी थी। आरोप है कि पुलिस ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

जहरीला पदार्थ खाकर अस्पताल पहुँचा पीड़ित, इलाज के दौरान मौत

दोहरी प्रताड़ना और न्याय न मिलने से हताश होकर मनोज राठौर ने शनिवार (1 अगस्त 2026) की शाम करीब 5 बजे सल्फास खा लिया। गंभीर हालत में उन्हें पहले मारकी महू अस्पताल और फिर जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। सामने आए वायरल वीडियो में मृतक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए डॉक्टर पर चांदी हड़पने और दामाद द्वारा बेटी को स्वीकार न करने का दर्द बयां किया है।

सिरसी थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर सवाल

घटना के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। सिरसी थाना प्रभारी का तर्क है कि दोनों पक्षों ने थाने आकर मौखिक राजीनामा कर लिया था, इसलिए आगे की कार्रवाई नहीं की गई। हालाँकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि आवेदन पर समय रहते विधिक कार्रवाई होती, तो मनोज जीवित होते। पूर्व में बमोरी पदस्थापना के दौरान भी थाना प्रभारी पर ऐसे ही आरोप लगते रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।