यूरिया खाद संकट से बेहाल किसान : ई-टोकन बंद होते ही फिर लौटी पुरानी 'बदहाली', नानाखेड़ी केंद्र पर रात भर जगने को मजबूर

अव्यवस्था का 'डबल लॉक': 3-3 दिनों तक कतारों में डटे ग्रामीण, तड़के 4 बजे से लग रही भीड़; महिला किसानों का भी बुरा हाल

यूरिया खाद संकट से बेहाल किसान :   ई-टोकन बंद होते ही फिर लौटी पुरानी 'बदहाली', नानाखेड़ी केंद्र पर रात भर जगने को मजबूर
नानाखेड़ी वितरण केंद्र पर गुरुवार को भी किसानों की भारी भीड़ लगी रही।

गुना। दयालवाणी

जिले में यूरिया खाद की भारी किल्लत ने किसानों की नींद उड़ा दी है। नानाखेड़ी स्थित डबल लॉक यूरिया वितरण केंद्र पर इन दिनों अव्यवस्था और किसान-आक्रोश का नजारा आम हो चुका है। पहले जहाँ खाद वितरण में सहूलियत की बातें की जा रही थीं, वहीं अब ई-टोकन प्रणाली बंद होते ही केंद्रों पर एक बार फिर किसानों की किलोमीटर लंबी कतारें लौटने लगी हैं। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आए किसान रात के अंधेरे से ही - तड़के सुबह 4 बजे से - लाइन में खड़े होने को मजबूर हैं, लेकिन 3-3 दिनों तक चक्कर काटने के बाद भी अधिकतर लोगों को खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है।

भीषण धूप और बारिश के अनिश्चित मौसम के बीच वितरण केंद्र पर केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में महिला किसान भी लंबी-लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करती नजर आ रही हैं। कतार में घंटों से खड़े किसानों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि इस समय मक्के की फसल के लिए यूरिया की बेहद सख्त जरूरत है। अगर सही समय पर फसलों को यूरिया नहीं मिला, तो पूरी फसल चौपट होने का डर है। महीनों की मेहनत और पूंजी दांव पर लगी होने के कारण किसान उत्पादन को लेकर भारी तनाव में हैं। किसानों का यह भी आरोप है कि केंद्र के कुछ काउंटरों पर मशीनें बार-बार खराब हो रही हैं और बेहद धीमी गति से काम कर रही हैं। सर्वर और मशीनों की इस तकनीकी लाचारी ने वितरण प्रक्रिया को कछुआ गति में बदल दिया है।

जिस ई-टोकन का हुआ था भारी विरोध, आज उसी की दुहाई दे रहे किसान

इस पूरी अफरा-तफरी के बीच सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि कतार में खड़े किसान अब पुरानी ई-टोकन प्रणाली को ही बेहतर बता रहे हैं। किसानों का कहना है कि कम से कम ई-टोकन व्यवस्था में समय तय होता था और बेवजह दिनों-दिनों तक लाइन में खड़ा नहीं रहना पड़ता था। बिना व्यवस्थित टोकन के अब यहाँ केवल अफरा-तफरी मची है। रोचक बात यह है कि जब सरकार ने पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से ई-टोकन व्यवस्था लागू की थी, तब मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसका पुरजोर विरोध किया था। कांग्रेस के एक बड़े विरोध-प्रदर्शन और आंदोलन के दबाव में आकर सरकार ने ई-टोकन प्रणाली को वापस लेने का फैसला किया था। लेकिन आज हकीकत यह है कि पुरानी व्यवस्था लागू होते ही केंद्रों पर दोबारा मारामारी शुरू हो गई है और वही किसान अब पुरानी टोकन व्यवस्था को बेहतर मान रहे हैं।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

नानाखेड़ी डबल लॉक केंद्र पर मची इस भगदड़ और अव्यवस्था को देखते हुए किसानों ने स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। किसानों का कहना है कि केंद्र पर बंद पड़ी या खराब मशीनों को तत्काल दुरुस्त किया जाए। वितरण काउंटरों की संख्या में बढ़ोतरी की जाए। खाद के पारदर्शी वितरण के लिए एक सुचारू और व्यवस्थित टोकन प्रणाली को पुन: लागू किया जाए। यदि समय रहते वितरण व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो किसानों का गुस्सा कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।