बमोरी के जंगलों में लापरवाही का 'शिकार'

डीएफओ ने तीन वनकर्मियों को किया सस्पेंड, अतिक्रमण और अवैध उत्खनन पर बड़ी चोट

बमोरी के जंगलों में लापरवाही का 'शिकार'

अनंत न्यूज़ @गुना। जिले में वन संपदा की सुरक्षा को लेकर वन विभाग अब 'एक्शन मोड' में नजर आ रहा है। बमोरी वन परिक्षेत्र में ड्यूटी के दौरान आंखें मूंदकर बैठने वाले कर्मचारियों पर गाज गिरी है। वन मण्डल पदाधिकारी अक्षय राठौर ने कर्तव्य में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता बरतने के आरोप में विशनवाड़ा के परिक्षेत्र सहायक सहित दो बीटगार्डों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस कार्रवाई ने विभाग के भीतर हड़कंप मचा दिया है और स्पष्ट संदेश दिया है कि वनों के साथ खिलवाड़ करने वालों और उन्हें मूक सहमति देने वालों की अब खैर नहीं।

दरअसल, वनों की सुरक्षा का दावा करने वाले जमीनी अमले की पोल उस समय खुली जब वरिष्ठ अधिकारी खुद धरातल पर उतरे। 2 अप्रैल को वन संरक्षक शिवपुरी वृत्त और डीएफओ गुना अक्षय राठौर ने संयुक्त रूप से बमोरी परिक्षेत्र का औचक दौरा किया था। इस दौरान विशनवाड़ा 'ब' और परांठ बीट के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कक्षों में सड़क किनारे जो नजारा दिखा, वह चौंकाने वाला था। अधिकारियों ने देखा कि बड़े पैमाने पर वनक्षेत्र में अतिक्रमण कर लिया गया है। अवैध रूप से पत्थरों का उत्खनन कर नवीन दीवारें खड़ी कर दी गई थीं और हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाकर अवैध कटाई की गई थी। अधिकारियों को संदेह हुआ कि इतना बड़ा काम बिना स्थानीय अमले की मिलीभगत या घोर लापरवाही के संभव नहीं है।

दोबारा जांच में गायब मिले वन रक्षक

7 अप्रैल को डीएफओ अक्षय राठौर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे स्टाफ के साथ दोबारा निरीक्षण किया। इस बार भी मौके पर अतिक्रमण और अवैध दीवारें वैसी ही मिलीं, लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जिन बीटों पर यह अवैध काम चल रहा था, वहां के जिम्मेदार कर्मचारी अपनी ड्यूटी से ही नदारद पाए गए। वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर मौजूद न मिलना अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना गया।

इन पर गिरी निलंबन की गाज

डीएफओ अक्षय राठौर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरतने वाले प्रभात कुमार वाजपेयी परिक्षेत्र सहायक, विशनवाड़ा (कार्यवाहक वनपाल), शैलेन्द्र रघुवंशी बीटगार्ड, विशनवाड़ा 'ब' (वनरक्षक), दिलीप कुमार मीना बीटगार्ड, परांठ बीट (वनरक्षक) को निलंबित किया गया है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि इन कर्मचारियों को अपने क्षेत्र में हो रहे अवैध कार्यों और अतिक्रमण की पूरी जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने न तो मौके पर कोई कानूनी कार्रवाई की और न ही समय रहते वरिष्ठ कार्यालय को इसकी सूचना देना उचित समझा।

बदले गए मुख्यालय, स्टाफ में हड़कंप

निलंबन की इस कार्रवाई के साथ ही तीनों कर्मचारियों के मुख्यालय भी बदल दिए गए हैं। निलंबन अवधि के दौरान प्रभात वाजपेयी का मुख्यालय वन परिक्षेत्र बीनागंज तय किया गया है, जबकि शैलेन्द्र रघुवंशी का मुख्यालय म्याना (मकसूदनगढ़) और दिलीप कुमार मीना का मुख्यालय भी अन्य क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया गया है। नियमों के अनुसार इन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। डीएफओ अक्षय राठौर की इस सख्त कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि गुना जिले में वन भूमि पर अवैध कब्जा, पत्थरों का अवैध उत्खनन और पेड़ों की कटाई के खिलाफ अब शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई जाएगी। जंगल के 'रक्षक' अगर 'भक्षक' बनेंगे या आंखें मूंदेंगे, तो उन्हें भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।