गुना में धार्मिक उत्साह का सैलाब

13 साल बाद मुनि पुंगव सुधासागर जी का मंगल आगमन , 17 जून से शुरू होगा 5 जिनालयों का भव्य पंचकल्याणक महोत्सव

गुना में धार्मिक उत्साह का सैलाब
गुना जिले की सीमा पर मुनिश्री की मंगल आगवानी में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा

गुना। अनंत न्यूज़

धर्म नगरी गुना के इतिहास में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। जैन समाज के सर्वोच्च संतों में शुमार मुनि पुंगव श्री 1008 सुधासागर जी महाराज ससंघ का करीब 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद गुना की पावन धरा पर मंगल आगमन हो गया है। मुनिश्री अशोकनगर जिले से विहार करते हुए मंगलवार शाम को गुना के सिंगवासा क्षेत्र में पहुंचे, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया।
आज यानी बुधवार सुबह से पूरा गुना शहर मुनिश्री की भव्य और ऐतिहासिक अगवानी के लिए पूरी तरह सज चुका है। पूज्य मुनिश्री के स्वागत के लिए शहर की एक-एक गली और तोरण द्वारों को विशेष रूप से सजाया गया है। इस मंगल प्रवेश को लेकर न केवल जैन समाज, बल्कि संपूर्ण सनातनियों और आम नागरिकों में अभूतपूर्व उत्साह और श्रद्धा का माहौल देखा जा रहा है।

17 जून से महामहोत्सव

मुनिश्री सुधासागर जी महाराज के इस पावन चातुर्मास और आगमन की मुख्य वजह शहर में आयोजित होने जा रहा एक विशाल धार्मिक अनुष्ठान है। आगामी 17 जून से 22 जून तक गुना में 'पांच जिनालयों के श्री 1008 मज्जिनेंद्र जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव' का भव्य आयोजन होने जा रहा है। नसियाजी में जैन समाज के पदाधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस छह दिवसीय महोत्सव के दौरान गुना के नवनिर्मित पांच भव्य मंदिरों (जिनालयों) में भगवान की प्रतिमाओं की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी।

पाषाण प्रतिमाएं बनेंगी पूजनीय, मुनिश्री देंगे 'सूर्यमंत्र'

इस पंचकल्याणक महोत्सव का सबसे मुख्य और आध्यात्मिक आकर्षण मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की पावन सन्निधि है। मुनिश्री गुना शहर के इन सभी पांचों नवनिर्मित जिनालयों में स्वयं पहुंचेंगे और वहां की पाषाण (पत्थर) की प्रतिमाओं में 'सूर्यमंत्र' देने की विशेष व गुप्त धार्मिक प्रक्रिया को संपन्न कराएंगे। इस मांगलिक विधि के पूर्ण होते ही ये पाषाण प्रतिमाएं साक्षात भगवान के पूजनीय स्वरूप में परिवर्तित हो जाएंगी और भक्तगण उनकी वेदी पर अभिषेक व पूजन कर सकेंगे।