कब्जे दिलाए, रोड डलवाई फिर भी शुरू नहीं हो सका ट्रांसपोर्ट नगर, 40 साल से वीरान पड़ा ट्रांसपोर्ट नगर
तमाम प्रयासों के बावजूद शुरू नहीं हो पा रहा यातायात नगर
अनंत न्यूज़ @गुना। शहर के अंदर वाहनों की रेलम-पेल रोकने के लिए करीब 40 साल पहले चिन्हित किए गए यातायात नगर में अब तक वीरानी पसरी हुई है। पिछले साल ट्रांसपोर्ट नगर में कलेक्टर और नगरपालिका द्वारा भू-खंड मालिकों को कब्जे दिलवाए और कई विकास कार्य भी हुए। इसके बाद ट्रांसपोर्ट संचालक यहां शिफ्ट नहीं हुए हैं। शहर में नपा द्वारा गोकुल सिंह चक और चिंताहरण मंदिर के बीच बनाया ट्रांसपोर्ट नगर (यातायात नगर) अब तक शुरू नहीं हो पाया।
40 साल पूर्व इसे विकसित करने भूखंड आवंटित किए थे। लेकिन इसमें अब तक लोग शिफ्ट नहीं हो पाए। नपा ने 661 लोगों को भूखंड आवंटित किए हैं। 575 से अधिक भूखंड तो कौडिय़ों के दाम बांट दिए गए। लेकिन नपा लोगों को यहां पर शिफ्ट नहीं कर पाई और ना ही उनके भूखंड निरस्त किए गए। भूखंड धारकों का तर्क है कि मौके पर सुविधाओं का अभाव है। सबसे ज्यादा चर्चा यहां सुरक्षा को लेकर रहती है। ट्रांसपोर्ट नगर शुरू न होने से आज भी एबी रोड पर वाहनों की मरम्मत आदि का काम चल रहा है, जिससे कभी-कभी एबी रोड पर जाम भी लग जाता है। नपा ने सबसे पहले यहां 1986 में भूखंड आवंटित किया था। इसके बाद चार बार भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। लेकिन लोगों ने यहां पर ना तो अपने वर्कशॉप बनाए और ना ही अपने वाहन खड़े किए। नपा ने नगर बसाने बिजली, पानी, नाली और सड़क पर लाखों रुपए खर्च किए, लेकिन इसका लाभ नहीं मिल पाया। उधर, वाहनों के शिफ्ट नहीं होने से बड़ी संख्या में वाहन एबी रोड किनारे ही खड़े किए जा रहे हैं। इस वजह से शहर में ट्रैफिक का दबाव रहता है। हनुमान चौराहा, जयस्तंभ चौराहा, तेलघानी पर जाम के हालात रहते हैं। इससे लोगों को असुविधा होती है। बाजार में जाम के हालात रहते हैं।
रोड किनारे खड़े किए जा रहे वाहन
यातायात नगर शुरू नहीं होने से ट्रक और रोड लाईन्स का दबाव शहर में रहता है। शहरी क्षेत्र में रोड लाईन्स संचालित हैं। इसके अलावा ट्रकों को एबी रोड पर सड़क किनारे जगह-जगह रखे जा रहे हैं। संजय स्टेडियम में ही कई ट्रक रखे जाते हैं। इसी तरह नानाखेड़ी मंडी गेट से लेकर कुशमौदा औद्योगिक क्षेत्र तक कई जगह ट्रक खड़े किए जा रहे हैं। शहर में ट्रकों से हादसे हो रहे हैं। हाल ही में जिला प्रशासन ने शहर के कई इलाकों में नो एंट्री लागू कर दी है। लेकिन यातायात नगर को व्यवस्थित करना स्थाई समाधान के रूप में देखा जा रहा है, जिसपर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
1986 से 2000 के बीच बांटे थे भूखंड
नगरपालिका ने पहली बार भूखंड 1986 में बांटे। पहली बार कम लोग भूखंड लेने पहुंचे। 30 साल पहले यातायात नगर बेहद पिछड़ा क्षेत्र माना जाता था। फिर सन् 1989, 1992, 1995 और 2000 में भूखंडों का आवंटन हुआ। लोगों को भूखंडों पर कब्जा दिलाए। दो साल पहले भी कवायद की गई थी, लेकिन इसके बाद भी लोग शिफ्ट नहीं हुए। इसका नतीजा है कि करोड़ों की कीमत वाला यह क्षेत्र वीरान पड़ा है।
इन कामों के लिए दिए थे भूखंड
ट्रांसपोर्ट नगर में 661 लोगों को भूखंड आवंटित किए थे। इनमें ढ़ाबा, गोदाम, वर्कशॉप, चाय होटल, पान दुकान, मैकेनिक, वेल्डिंग वर्क्स, आटो पाटर््स, इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग, एसटीडी और होटल आदि खोले जाना थे। लेकिन किसी भूखंड में नींव डली हुई है तो किसी का बना तो वह क्षतिग्रस्त हो गया। उधर, नगरपालिका ने 4 से 5 हजार रुपए लेकर लोगों के भूखंड बुक किए थे। लेकिन 34 साल बाद भी सभी की राशि जमा नहीं हो पाई है। 575 भूखंड तो महज 7500 रुपए से 35 हजार रुपए तक के हैं, जिनकी कीमत बाजार मूल्य से 5 प्रतिशत भी नहीं है। पुराने आगर-मुम्बई रोड किनारे बनाए गए इस यातायात नगर में व्यापारियों ने अपने अलावा दूसरों के नाम से भी भूखंड ले लिए थे। नगरपालिका गुना की सख्ती नहीं होने से न तो व्यापारियों ने राशि जमा कराई और ना ही भूखंडों का निर्माण हुआ।
लोगों ने भूखंडों की राशि भी जमा नहीं की
यातायात नगर शुरू नहीं होने से ट्रक और रोड लाईन्स का दबाव शहर में रहता है। शहरी क्षेत्र में रोड लाईन्स संचालित हैं। इसके अलावा ट्रकों को एबी रोड पर सड़क किनारे जगह-जगह रखे जा रहे हैं। संजय स्टेडियम में ही कई ट्रक रखे जाते हैं। इसी तरह नानाखेड़ी मंडी गेट से लेकर कुशमौदा औद्योगिक क्षेत्र तक कई जगह ट्रक खड़े किए जा रहे हैं। शहर में ट्रकों से हादसे हो रहे हैं। बिजली-पानी की दी थीं सुविधाएं: यातायात नगर विकसित करने नपा ने लाखों रुपए खर्च कर बिजली, पानी की व्यवस्था की थी। पानी के लिए टंकी का निर्माण कराया, लेकिन देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त हो गई है। सड़कों और नाली का निर्माण कराया था, लेकिन नपा लोगों को यहां पर शिफ्ट नहीं करा पाई। जिससे इस भूमि का उपयोग नहीं हो पाया। हालांकि कुछ समय पूर्व तत्कालीन कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम के निर्देशन में कुछ भूखंड मालिकों ने राशि जमा की। लेकिन वह भी प्यवसाय के लिए मौके पर नहीं पहुंचे।