सिर्फ खाने की बात पर आई थी तलाक की नौबत, लोक अदालत में फिर मिले

18 महीने की बेटी के साथ घर लौटे पति-पत्नी

सिर्फ खाने की बात पर आई थी तलाक की नौबत, लोक अदालत में फिर मिले
दम्पत्ति को गुलदस्ता भेंट कर विदा करते प्रधान न्यायाधीश।

अनंत न्यूज़ @गुना। कहते हैं कि रिश्तों में छोटी सी दरार कभी-कभी बड़ी खाई बन जाती है, लेकिन अगर नीयत साफ हो तो कानून की चौखट भी घर बसाने का जरिया बन सकती है। साल 2026 की पहली लोक अदालत में एक ऐसा ही मामला सामने आया, जहाँ महज 'समय पर खाना न बनने' जैसी छोटी सी बात पर अलग हुए पति-पत्नी ने गिले-शिकवे भुलाकर फिर से एक-दूसरे का हाथ थाम लिया।

मामला आरोन तहसील के ग्राम बिदोरिया का है। वीरेंद्र अहिरवार और उनकी पत्नी सविता के बीच करीब चार महीने पहले विवाद हुआ था। विवाद की जड़ सिर्फ इतनी थी कि पत्नी ने समय पर खाना नहीं बनाया था। बात इतनी बढ़ी कि सविता अपने मायके चली गई और पिछले 4 महीनों से वहीं रह रही थी। पति वीरेंद्र ने उसे वापस लाने के लिए न्यायालय में 'धारा 9' वैवाहिक अधिकारों की बहाली के तहत आवेदन दिया था। मामला टूटने के कगार पर था और दोनों एक-दूसरे से अलग रहने की ठान चुके थे। इस पूरे प्रकरण में खास बात यह रही कि पति-पत्नी, दोनों की पैरवी वकील नूर अख्तर नूर ने की। उन्होंने दोनों पक्षों को आपसी समझौते के लिए प्रेरित किया। शनिवार को लोक अदालत के दौरान न्यायाधीश ने दोनों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और आपसी तालमेल बनाए रखने की सलाह दी। न्यायाधीश और वकील की समझाइश के बाद दोनों ने पुरानी बातों को भुलाकर साथ रहने का फैसला किया। लोक अदालत परिसर में शनिवार को नजारा बेहद भावुक था। वीरेंद्र और सविता ने एक-दूसरे को माला पहनाई और राजी-खुशी साथ रहने का संकल्प लिया। सबसे ज्यादा खुशी उनकी 18 महीने की मासूम बेटी के चेहरे पर दिखी, जिसे लेकर दोनों दंपत्ति मुस्कुराते हुए अपने घर बिदोरिया के लिए रवाना हुए। लोक अदालत केवल कानूनी विवादों को नहीं सुलझाती, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करती है। वीरेंद्र और सविता का यह समझौता उन लोगों के लिए एक मिसाल है, जो छोटी-छोटी बातों पर आवेश में आकर परिवार बिखेर लेते हैं।