गुना पुलिस ने बुलाई बस ऑपरेटर्स की 'क्लास'
चालकों के लाइसेंस से लेकर टायर-वायरिंग तक की होगी कड़ाई से जांच
गुना।अनंत न्यूज़
जिले में आमजन की सुरक्षा और सुरक्षित यातायात व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल की गई। गुना पुलिस अधीक्षक हितिका वासल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मान सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन एवं डीएसपी ट्रैफिक मुकेश कुमार दीक्षित के पर्यवेक्षण में ट्रैफिक थाना प्रभारी निरीक्षक अजयप्रताप सिंह द्वारा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) ज्ञानेंद्र वैश्य एवं उनकी टीम के साथ संयुक्त रूप से गुना पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के समस्त बस आॅपरेटर्स की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यात्री बसों के संचालन में सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करना और सफर के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना रहा। पुलिस और परिवहन विभाग के आला अधिकारियों ने बस संचालकों के साथ सीधा संवाद कर उन्हें नियमों के दायरे में रहकर बसों का संचालन करने की सख्त हिदायत दी। बैठक के दौरान जिले भर से आए बस आॅपरेटर्स को संबोधित करते हुए अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सड़कों पर दौड़ने वाली हर यात्री बस को सुरक्षा के कड़े पैमानों पर खरा उतरना होगा। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुरक्षित यातायात व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों द्वारा बस संचालकों को बिंदुवार आवश्यक निर्देश दिए गए, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा। बैठक में सबसे पहला और महत्वपूर्ण निर्देश बसों के दरवाजों और आपातकालीन द्वारों को लेकर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि बसों में यात्रियों के सुरक्षित चढ़ने और उतरने के लिए निर्धारित माप के दरवाजे होना अनिवार्य है। इसके साथ ही प्रत्येक बस में इमरजेंसी गेट (आपातकालीन द्वार) न केवल उपलब्ध होना चाहिए, बल्कि वह पूरी तरह से कार्यशील स्थिति में भी होना चाहिए। अधिकारियों ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि किसी भी बस में इमरजेंसी गेट के सामने अतिरिक्त सीट नहीं लगाई जाएगी, ताकि आपातकालीन स्थिति में यात्री बिना किसी बाधा के वहां तक पहुंच सकें। इस गेट को सदैव सुगमता से खुलने योग्य बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया ताकि किसी भी हादसे के वक्त इसे तुरंत खोला जा सके।
फायर सेफ्टी मानकों का पालन करना अनिवार्य
हाल के दिनों में यात्री वाहनों में आगजनी की घटनाओं को दृष्टिगत रखते हुए बैठक में फायर सेफ्टी को लेकर विशेष कड़ाई बरतने की बात कही गई। बस संचालकों को निर्देशित किया गया कि सभी बसों में अकर-135 मानकों के अनुरूप फायर डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम एवं फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम को अनिवार्य रूप से चालू और कार्यशील स्थिति में रखा जाए। इसके अलावा, प्रत्येक बस में निर्धारित क्षमता के अनुसार अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) गैस से भरे हुए और सही हालत में मौजूद होने चाहिए। केवल उपकरण लगाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि बस के चालक और परिचालक को इन फायर फाइटिंग उपकरणों के संचालन का पूरा ज्ञान होना चाहिए। बस आॅपरेटर्स से कहा गया कि वे अपने स्टाफ को आपातकालीन उपयोग का प्रशिक्षण अवश्य दिलाएं ताकि समय रहते किसी भी अप्रिय स्थिति पर काबू पाया जा सके।
टायर और इलेक्ट्रिक वायरिंग की नियमित जांच
अधिकारियों ने वाहनों की यांत्रिक और तकनीकी फिटनेस पर जोर देते हुए कहा कि बसों के टायर, वायरिंग और समस्त इलेक्ट्रिक उपकरण पूरी तरह सुरक्षित और बेहतर स्थिति में होने चाहिए। कई बार शॉर्ट सर्किट के कारण बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, इसलिए समय-समय पर पूरी वायरिंग की तकनीकी जांच कराई जाए। इसके साथ ही प्रत्येक बस में आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयों के साथ फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक चिकित्सा किट) की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मानसून और आगामी मौसम को ध्यान में रखते हुए बसों की विंडस्क्रीन साफ रखने तथा वाइपर को पूरी तरह कार्यशील स्थिति में रखने की हिदायत दी गई ताकि बारिश के दौरान चालकों को दृश्यता की समस्या न हो।
ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध
बैठक में अवैध रूप से माल परिवहन और ज्वलनशील पदार्थों को लेकर सख्त रुख अपनाया गया। अधिकारियों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यात्री बसों की छतों पर या डिग्गी में किसी भी प्रकार के ज्वलनशील अथवा विस्फोटक पदार्थों का परिवहन पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। बसों का उपयोग केवल यात्रियों को लाने और ले जाने के लिए है, न कि व्यावसायिक कमर्शियल लोडिंग के लिए। यात्रियों के निजी सामान के अतिरिक्त यदि कोई अन्य पार्सल या सामान रखा जाता है, तो उसे नियमानुसार पूरी जांच-पड़ताल और तसल्ली के उपरांत ही वाहन में रखा जाएगा। यदि किसी बस में प्रतिबंधित सामग्री पाई जाती है, तो बस संचालक के खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।