बमौरी की मैडम एसडीएम का गुस्सा सातवें आसमान पर
प्राचार्य से बोलीं-ऐसा लग रहा है मानो स्कूल तुम्हारे पिताजी का हो
गुना। अनंत न्यूज़
जिले से नौकरशाही के घमंड और एक राष्ट्र निमार्ता शिक्षक के सरेआम अपमान का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। बमौरी के फतेहगढ़ स्थित सांदीपनि विद्यालय में निरीक्षण के नाम पर पहुंचीं एसडीएम शिवानी पांडे ने पद के मद में चूर होकर प्रशासनिक मयार्दाओं को तार-तार कर दिया।
मैडम एसडीएम का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर था कि उन्होंने शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं देने वाले बुजुर्ग प्राचार्य भगवत प्रसाद की गरिमा को सरेआम ठेस पहुंचाई और बेहद अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए कह डाला- ऐसा लग रहा है मानो स्कूल तुम्हारे पिताजी का हो। घटना का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर आम जनता और शिक्षक वर्ग में भारी आक्रोश है। पूरा मामला तब शुरू हुआ जब एसडीएम शिवानी पांडे विद्यालय परिसर में जलभराव की गंभीर शिकायत और अवैध अतिक्रमण का जायजा लेने पहुंची थीं। मौके पर मौजूद प्राचार्य भगवत प्रसाद ने एक जिम्मेदार प्रशासनिक अंग होने के नाते अधिकारी को जमीनी हकीकत से रूबरू कराया। उन्होंने साफ शब्दों में बताया कि स्कूल की बाउंड्री वॉल पर अगरिया समाज के लोगों ने अवैध अतिक्रमण कर रखा है, जिसके कारण जलभराव और अन्य समस्याएं खड़ी हो रही हैं। लेकिन अपनी प्रशासनिक विफलताओं और सिस्टम की कमियों को दूर करने के बजाय, एसडीएम साहिबा को एक शिक्षक द्वारा हकीकत का आईना दिखाया जाना रास नहीं आया। अपनी कमी छुपाने के लिए उन्होंने उल्टा शिकायत करने वाले बुजुर्ग प्राचार्य पर ही अपनी पूरी ताकत और पद का रौब झाड़ना शुरू कर दिया।
ट्रांसफर करने की भी चेतावनी
वायरल वीडियो में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील पद पर बैठीं महिला अधिकारी किस तरह एक उम्रदराज शिक्षक और संस्था के प्रमुख को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं। मयार्दा की सारी सीमाएं लांघते हुए एसडीएम शिवानी पांडे ने प्राचार्य को डांटते हुए कहा: स्कूल की सबसे बड़ी समस्या तुम खुद हो। यदि तुम्हारा ट्रांसफर यहां से करवा दिया जाए तो सारी समस्याएं हल हो जाएंगी। जिस तरह की तुम्हारी हरकतें हैं, मुझे लगता है स्कूल तुम्हारे पिताजी का है।
सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया
कुल मिलाकर एक तरफ सरकार शिक्षकों को 'गुरु' का दर्जा देकर सम्मानित करने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ गुना की यह घटना बताती है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक अधिकारी शिक्षकों को क्या समझते हैं। एक बुजुर्ग शिक्षक के लिए 'पिताजी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर सरेआम धौंस जमाना और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना सीधे तौर पर पद का दुरुपयोग और तानाशाही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासनिक कड़े रुख का मतलब बदतमीजी और बदजुबानी होता है? पीड़ित प्राचार्य और पूरा शिक्षक समाज अब इस मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।
कलेक्टर को दी थी गलत जानकारी: एसडीएम
इस मामले में एसडीएम शिवानी पांडे से जानकारी लेना चाही गई तो उन्होंने दावा किया कि प्राचार्य द्वारा कलेक्टर सर को गलत जानकारी दी गई थी। वे अगरिया समुदाय पर अतिक्रमण का आरोप लगा रहे थे, लेकिन अभी तक स्कूल की जमीन का सीमांकन नहीं हुआ है। ऐसे में केवल स समुदाय को दोषी ठहराना ठीक नहीं है। प्राचार्य ने स्कूल की बाउंड्री को भी गलत तरीके से बढ़ा दिया था। उनके लिए केवल स्कूल महत्वपूर्ण है। मेरे लिए हर संस्था और समुदाय महत्व रखता है।