सोजना में गहराया पेयजल संकट, बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण
400 फीट गहरी पाइपलाइन खींचने को मजबूर महिलाएं
गुना। दयालवाणी
एक तरफ जहां नल-जल योजनाओं के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जिले मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्र सोजना गांव में ग्रामीण पिछले चार सालों से भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। गांव में पानी की किल्लत का आलम यह है कि ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए दूषित नाले का पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है। मंगलवार को सोजना गांव की आक्रोशित महिलाओं और ग्रामीणों ने गुना कलेक्ट्रेट पहुंचकर जनसुनवाई में अपनी पीड़ा व्यक्त की और शासन-प्रशासन से गुहार लगाई।
गांव में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हैंडपंप में डाली गई मोटर बार-बार खराब हो जाती है। जब भी पंचायत कर्मी मरम्मत के लिए मौके पर पहुंचते हैं, तो जोखिम भरे काम में स्थानीय ग्रामीण महिलाओं को ही 400 फीट गहराई से भारी-भरकम पाइपलाइन खींचने के काम में लगा दिया जाता है। पानी की मजबूरी के कारण महिलाएं जान जोखिम में डालकर यह काम करने को तैयार हो जाती हैं। जनसुनवाई में पहुंची महिलाओं ने बताया कि क्षेत्र में वाटर लेवल काफी नीचे चला गया है, लेकिन गहराई तक पर्याप्त पाइपलाइन नहीं डाली गई है, जिससे मोटर पानी नहीं उठा पा रही है। पिछले चार वर्षों से गांव में पानी की विकराल समस्या बनी हुई है। स्वच्छ पेयजल न मिलने के कारण ग्रामीण नाले का पानी पीने को विवश हैं, जिससे बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। कलेक्ट्रेट पहुंची महिलाओं और ग्रामीणों ने जनसुनवाई में स्पष्ट मांग रखी है कि गांव में तुरंत नया ट्यूबवेल खनन कराया जाए और पर्याप्त गहराई तक पाइपलाइन डालकर नियमित जलापूर्ति शुरू की जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।