जानलेवा हमले में युवक की मौत को पुलिस बताती रही हादसा!
दो महीने बाद एफआईआर के लिए एसपी दफ्तर पहुंचे परिजन
गुना।दयालवाणी
पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनहीनता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। दो महीने पहले नेशनल हाईवे पर हुए हमले में गंभीर रूप से घायल युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, लेकिन राघौगढ़ पुलिस इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बजाय इसे सड़क दुर्घटना करार देती रही। न्याय की आस में भटक रहे पीड़ित परिजन सोमवार को एसपी कार्यालय पहुंचे और शिकायती आवेदन देकर निष्पक्ष जांच व हत्या की धाराओं में मामला दर्ज करने की गुहार लगाई।
ग्राम साकोन्या निवासी पुनीत गुर्जर और उनके भाई दीनदयाल गुर्जर एक निजी कंपनी में काम करते थे, जो नल-जल योजना के तहत कार्य कर रही थी। परिजनों के अनुसार, 12 जून को नेशनल हाईवे पर स्थित एक ढाबे के पास दोनों भाइयों पर अज्ञात लोगों ने अचानक हमला कर दिया। इस हमले में पुनीत किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकला, जबकि उनका भाई दीनदयाल गंभीर रूप से घायल हो गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजनों ने दीनदयाल को तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां से उसे भोपाल रेफर कर दिया गया। परिजनों का आरोप है कि घटना वाले दिन जब वे जंजाली चौकी और फिर राघौगढ़ थाने पहुंचे, तो थाना प्रभारी ने संवेदनहीन रवैया अपनाते हुए कहा कि 'पहले मरीज को थाने लेकर आओ, तब रिपोर्ट दर्ज होगी।' भोपाल के एक निजी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझते हुए 15 जून को दीनदयाल ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही आक्रोशित परिजनों ने 15 जून की रात जंजाली चौकी के सामने शव रखकर चक्काजाम कर दिया था। उस समय पुलिस अधिकारियों ने 72 घंटे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई।