कलेक्ट्रेट में हंगामा: सिंगवासा चक की महिलाओं का जिला प्रशासन को दो टूक अल्टीमेटम

जब तक बिजली नहीं, बच्चों संग यहीं रहेगा हमारा आशियाना

कलेक्ट्रेट में हंगामा: सिंगवासा चक की महिलाओं का जिला प्रशासन को दो टूक अल्टीमेटम
कलेक्ट्रेट में डेरा जमाकर बैठे सिंगवासा चक के ग्रामीण।

गुना।अनंत न्यूज़

जिला मुख्यालय से महज कुछ ही दूरी पर स्थित सिंगवासा चक में बिजली संकट को लेकर ग्रामीणों के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में उस समय हाई-वोल्टेज ड्रामा और हंगामे की स्थिति बन गई, जब गांव की दर्जनों आक्रोशित महिलाएं अपने मासूम बच्चों को गोद में लिए कलेक्ट्रेट परिसर में दाखिल हुईं। जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और सालों की उपेक्षा से नाराज इन महिलाओं ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर खड़े होकर अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही महिलाओं का गुस्सा इस कदर सातवें आसमान पर था कि उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर को ही अपना अस्थाई ठिकाना बनाने का ऐलान कर दिया। प्रशासन के आला अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए महिलाओं ने कहा, साहब! बहुत हो चुके आपके झूठे आश्वासन। अब जब तक हमारी बस्ती में बिजली का खंभा और डीपी नहीं लगेगी, हम अपने बच्चों के साथ इसी कलेक्ट्रेट परिसर में रहेंगे, यहीं खाएंगे और यहीं सोएंगे। हमारे बच्चे रातभर अंधेरे में रोते हैं, कम से कम यहां पंखे की हवा में तो सो सकेंगे। प्रदर्शनकारी महिलाओं और बुजुर्गों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए जिला प्रशासन की असंवेदनशीलता को उजागर किया। ग्रामीणों ने बताया कि वे इस अंधेरे से मुक्ति पाने के लिए साल 2023 से लगातार कलेक्ट्रेट और विद्युत विभाग के चक्कर काट रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में दर्जनों बार लिखित आवेदन दिए गए, जनसुनवाई में गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार अधिकारियों ने केवल जांच और जल्द निराकरण का कागजी आश्वासन देकर उन्हें वापस लौटा दिया। तीन साल बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे पूरी बस्ती में प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष व्याप्त है।

डिजिटल इंडिया में आदिम युग जैसी जिंदगी

सिंगवासा चक की यह बस्ती आज के आधुनिक दौर में भी लालटेन और मोमबत्ती के युग में जीने को मजबूर है। गांव के करीब 500 से अधिक परिवारों की जिंदगी सूरज ढलते ही ठहर जाती है। पूरी की पूरी आबादी को हर रात घने और डरावने अंधेरे के साए में काटनी पड़ती है। बिजली न होने का असर बच्चों की पढ़ाई और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि इस डिजिटल युग में ग्रामीणों को अपने मोबाइल फोन चार्ज कराने के लिए भी रोजाना कई किलोमीटर का सफर तय करके गुना शहर आना पड़ता है। मोबाइल चार्जिंग जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी ग्रामीणों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

जहरीले जीव-जंतुओं की दहशत और केंचुए वाला पानी

आगामी मानसून और बारिश के मौसम को लेकर पूरी बस्ती खौफ के साए में जी रही है। महिलाओं ने बताया कि गांव चारों तरफ से झाड़ियों से घिरा है। बिजली न होने के कारण रात के घाने अंधेरे में घरों के भीतर सांप, बिच्छू और अन्य जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बेहद बढ़ जाता है। टॉर्च की रोशनी के भरोसे रातें काटनी पड़ती हैं और जरा सी आहट होने पर पूरा परिवार डर के मारे जाग जाता है। बदहाली का आलम सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में पीने के पानी का भी भयावह संकट है। सरकारी वादों के उलट गांव में नल का पानी पूरी तरह दूषित और मटमैला आता है। मजबूरन ग्रामीणों को बोरवेल के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। इस बोरवेल के पानी की स्थिति यह है कि इसमें से जिंदा केंचुए निकल रहे हैं। इसी केंचुए वाले और दूषित पानी को पीने से गांव के बच्चे और सयाने लगातार बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। 500 से ज्यादा लोगों की इस बड़ी आबादी की सुध लेने वाला कोई जिम्मेदार नजर नहीं आ रहा है।

बीपीएल कोटे से तुरंत रखी जाए नई डीपी, वरना होगा चक्काजाम

कलेक्ट्रेट परिसर में घंटों चले हंगामे और प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने महिलाओं को समझाते हुए एक बार फिर जल्द से जल्द समस्या का स्थाई समाधान करने का भरोसा दिलाया और उन्हें वापस गांव भेजा। हालांकि, इस बार ग्रामीणों का रुख बेहद सख्त है। ग्रामीणों ने अपनी मुख्य मांग रखते हुए कहा है कि उनकी बस्ती में बिना किसी देरी के बीपीएल कोटे से एक नई डीपी (ट्रांसफार्मर) स्वीकृत कर रखवाई जाए, ताकि हर घर को स्थाई बिजली कनेक्शन मिल सके। महिलाओं ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी प्रशासन का यह भरोसा केवल कागजी साबित हुआ और एक हफ्ते के भीतर बिजली सप्लाई शुरू नहीं की गई, तो वे बिना किसी पूर्व सूचना के कलेक्ट्रेट का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगी और गुना के मुख्य मार्गों पर चक्काजाम करने को मजबूर होंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और विद्युत मंडल की होगी।