कलेक्टर बोले-'विकसित भारत-2047' के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी

बड़े किसान एक-एक एकड़ से करें शुरूआत

कलेक्टर बोले-'विकसित भारत-2047' के लिए प्राकृतिक खेती जरूरी

गुना। सबमिशन ऑफ़ एग्रीकल्चर एक्सटेंशन (आत्मा) योजना के अंतर्गत विश्व पर्यावरण दिवस और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मध्य जनकल्याणकारी योजकिसानों से संवाद करते हुए कलेक्टर कन्याल ने कहा कि जिले के किसान अब अधिक जागरूक और समझदार होते जा रहे हैं। उन्होंने उपस्थित कृषकों से उनके अनुभव भी साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने जानकारी दी कि जिले में लगभग 60 कृषि सखियां 30 सेक्टरों में कार्य कर रही हैं, जो किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। गुना जिले में मौजूद लगभग 3.50 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए तो इसके व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इस दौरान उन्होंने सिक्किम का उदाहरण देते हुए बताया कि वह देश का ऐसा राज्य है जहां पूरी तरह आॅर्गेनिक खेती की जाती है। कृषि क्षेत्र में नवाचार और विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए उन्होंने कुछ सफल उदाहरण भी साझा किए, जैसे कुछ किसान सब्जी उत्पादन से सालाना पांच लाख रुपये, थाई पिंक अमरूद की खेती से आठ लाख रुपये और पॉलीहाउस में गुलाब उत्पादन से 15 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक कमा रहे हैं।नाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, आरोन में प्राकृतिक कृषि आधारित कृषक संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि जिले के बड़े किसान शुरूआत में कम से कम एक-एक एकड़ भूमि से इसकी शुरूआत करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक वर्ष में उत्पादन कुछ कम हो सकता है, लेकिन समय के साथ मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, उत्पादन स्वास्थ्यवर्धक होगा और उत्पादकता में भी सुधार आएगा।

किसानों से संवाद करते हुए कलेक्टर कन्याल ने कहा कि जिले के किसान अब अधिक जागरूक और समझदार होते जा रहे हैं। उन्होंने उपस्थित कृषकों से उनके अनुभव भी साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने जानकारी दी कि जिले में लगभग 60 कृषि सखियां 30 सेक्टरों में कार्य कर रही हैं, जो किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। गुना जिले में मौजूद लगभग 3.50 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए तो इसके व्यापक सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे। इस दौरान उन्होंने सिक्किम का उदाहरण देते हुए बताया कि वह देश का ऐसा राज्य है जहां पूरी तरह आॅर्गेनिक खेती की जाती है। कृषि क्षेत्र में नवाचार और विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए उन्होंने कुछ सफल उदाहरण भी साझा किए, जैसे कुछ किसान सब्जी उत्पादन से सालाना पांच लाख रुपये, थाई पिंक अमरूद की खेती से आठ लाख रुपये और पॉलीहाउस में गुलाब उत्पादन से 15 लाख रुपये प्रतिवर्ष तक कमा रहे हैं।

पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलकर इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाने पर जोर

कलेक्टर ने जोर देकर कहा कि अब समय केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि किसानों को इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल अपनाते हुए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करना चाहिए और पशुधन को भी खेती का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। इससे लागत कम होगी, आय के स्रोत बढ़ेंगे और खेती अधिक टिकाऊ बनेगी। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री का विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार होगा जब किसानों की आय में निरंतर वृद्धि होगी और कृषि अधिक समृद्ध बनेगी।

कृषि सखियों और किसानों ने लिया पर्यावरण व लाभकारी खेती का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कृषकों और कृषि सखियों ने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिकरवार, एसडीएम आरोन मंजूषा खत्री, कृषि उपसंचालक संजीव शर्मा, उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे, जिसमें बड़ी संख्या में कृषकों और कृषि सखियों ने सक्रिय सहभागिता की।