रंगों से राख तक का सफर ! तीन दिन पहले गुलाल से सराबोर थे जो चेहरे, आज प्लास्टिक में लिपटे देख नम हो गईं आँखें

फंदे पर लटका मिला पति, बिस्तर पर थी पत्नि की लाश

रंगों से राख तक का सफर ! तीन दिन पहले गुलाल से सराबोर थे जो चेहरे, आज प्लास्टिक में लिपटे देख नम हो गईं आँखें
दम्पत्ति ने रंगपंचमी पर डाली थी सोशल मीडिया पर पोस्ट।

अनंत न्यूज़ @गुना। इंसानी रिश्तों और नियति के क्रूर खेल की एक ऐसी दास्तां गुना जिले के रुठियाई कस्बे से सामने आई है, जिसने सुनने वाले हर शख्स की रूह कपा दी है। अभी महज तीन दिन पहले ही तो चारों तरफ खुशियों के रंग बिखरे थे। रंगपंचमी का उल्लास था और बजरंगगढ़ की बीस भुजा कॉलोनी का रहने वाला 24 वर्षीय सूरज आदिवासी अपनी 23 वर्षीय पत्नी आरती के साथ जीवन के सबसे सुनहरे पल जी रहा था। सूरज ने बड़े चाव से आरती के चेहरे पर गुलाल मला था, हंसी-ठिठोली की थी और उन प्रेम भरे क्षणों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किए थे। उन तस्वीरों को देखकर कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था कि प्यार के उन रंगों के पीछे मौत का ऐसा काला साया छिपा बैठा है।

गुरुवार की सुबह जब रुठियाई के एक छोटे से कमरे का दरवाजा खुला, तो भीतर का मंजर देख लोगों का कलेजा मुंह को आ गया। जिन चेहरों पर तीन दिन पहले गुलाल की सुर्खी थी, वे आज सफेद पड़ चुके थे। आरती का बेजान शरीर फर्श पर पड़ा था और सूरज फंदे से झूल रहा था। सबसे ज्यादा हृदयविदारक दृश्य तब था जब अस्पताल ले जाने के लिए पुलिस ने उन देहों को प्लास्टिक में लपेटा। जो जोड़े कुछ दिन पहले सज-धजकर होली खेल रहे थे, उन्हें इस तरह बेजान और प्लास्टिक में लिपटा देख अस्पताल में मौजूद हर शख्स की आँखें छलक उठीं। सूरज और आरती की कहानी किसी फिल्मी पटकथा जैसी थी, लेकिन उसका अंत बेहद खौफनाक रहा। दोनों ने कुछ समय पहले ही समाज और परिवार की सहमति-असहमति के बीच प्रेम विवाह (लव मैरिज) किया था। दोनों एक-दूसरे के पूरक थे और गरीबी के बावजूद मेहनत-मजदूरी कर अपना छोटा सा संसार संवार रहे थे। मजदूरी के ही सिलसिले में वे कुछ दिनों पहले रुठियाई आए थे। सबसे मार्मिक बात यह है कि आरती गर्भवती थी। सूरज और आरती के जीवन में एक नन्हा मेहमान आने वाला था, जिसे लेकर दोनों ने न जाने कितने सपने बुने होंगे। लेकिन उन सपनों के हकीकत बनने से पहले ही यह परिवार काल के गाल में समा गया।

वह खौफनाक सुबह और भाई की चीख

घटना का खुलासा गुरुवार की सुबह तब हुआ जब सूरज के भाई ने कमरे के भीतर झांका। कमरे के भीतर सन्नाटा पसरा था, लेकिन वह सन्नाटा चीख-चीखकर किसी अनहोनी की गवाही दे रहा था। भाई ने देखा कि उसकी भाभी आरती फर्श पर पड़ी है और भाई सूरज फंदे पर लटका है। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस जब मौके पर पहुँची तो उसे संघर्ष के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले, जिससे प्राथमिक तौर पर यह माना जा रहा है कि सूरज ने पहले अपनी गर्भवती पत्नी का गला दबाकर उसकी हत्या की और फिर खुद भी मौत को गले लगा लिया।

एक अनसुलझी पहेली: आखिर क्यों?

इस दोहरी मौत ने पीछे कई अनसुलझे सवाल छोड़ दिए हैं। परिजनों और रिश्तेदारों का कहना है कि दोनों के बीच कभी कोई बड़ा विवाद नहीं देखा गया। वे एक खुशहाल जोड़े की तरह रहते थे। अगर कोई तनाव था भी, तो वह इतना गहरा कैसे हो गया कि सूरज ने अपनी उस पत्नी की जान ले ली जिससे वह बेपनाह मोहब्बत करता था? वह भी तब जब वह पिता बनने वाला था। क्या वह कोई आर्थिक तंगी थी, या कोई गुप्त मानसिक अवसाद, जो सोशल मीडिया की उन रंगीन मुस्कुराहटों के पीछे छिपा हुआ था?

पोस्टमार्टम और सिसकती संवेदनाएं

पुलिस ने दोनों शवों को जिला अस्पताल पहुँचाया, जहाँ गुरुवार दोपहर को उनका पोस्टमार्टम किया गया। मचुर्री के बाहर खड़े परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। वे बार-बार सूरज के उन आखिरी वीडियो को देख रहे थे जो अब केवल यादों का हिस्सा रह गए हैं। अस्पताल में मौजूद लोगों ने बताया कि जब शवों को पोस्टमार्टम के बाद एम्बुलेंस में रखा जा रहा था, तो हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी— कल तक जो साथ थे, आज वे साथ चले गए, पर पीछे कई जिंदगियों को उजाड़ गए। पुलिस अब इस मामले की हर कोण से जांच कर रही है। मोबाइल रिकॉर्ड्स और हाल के दिनों में उनके संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि उस 'वजह' तक पहुँचा जा सके जिसने इस हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया। फिलहाल, रुठियाई और बजरंगगढ़ के बीस भुजा कॉलोनी में मातम पसरा है और हवाओं में अभी भी उन अधूरे सपनों की सिसकियां महसूस की जा सकती हैं।