सूरज की तपिश से थर्राया गुना, पारा 44 पार - शाम की बूंदाबांदी ने राहत के बजाय बढ़ाई उमस
30 अप्रैल तक रहेगी 8वीं कक्षा तक की छुट्टी
गुना। अनंत न्यूज़
नक्षत्रों की चाल और जलवायु परिवर्तन का दोहरा प्रहार अब धरातल पर साफ नजर आने लगा है। गुना जिला इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। सोमवार को सूर्यदेव के तल्ख तेवरों ने शहरवासियों को झुलसा कर रख दिया। आलम यह रहा कि अधिकतम तापमान 44 डिग्री के पार पहुंच गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा ऐसा था मानो शहर में अघोषित कर्फ्यू लगा हो।
गुना में सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर सूर्योदय के साथ ही धूप में तीखापन महसूस होने लगा था। सुबह 10 बजे तक आते-आते गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच शहर की मुख्य सड़कें और बाजार पूरी तरह सुनसान नजर आए। जो लोग बहुत जरूरी काम से बाहर निकले, वे चेहरे और सिर को पूरी तरह ढंककर ही बाहर निकले। तेज धूप और लू के थपेड़ों के कारण राहगीरों का बुरा हाल रहा। शाम के समय मौसम ने अचानक करवट ली। करीब 10 मिनट तक हुई तेज बूंदाबांदी और गरज-चमक ने एक बार तो लोगों को राहत की उम्मीद जगाई, लेकिन यह उम्मीद जल्द ही बेहाल करने वाली उमस में बदल गई। गुना के अलावा बमोरी और आसपास के अंचल में भी बूंदाबांदी और फुहारें गिरी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जब भीषण गर्मी के बीच हल्की बारिश होती है, तो जमीन की तपन ऊपर की ओर उठती है, जिससे वातावरण में उमस का स्तर बढ़ जाता है। आंकड़े बताते हैं कि सुबह आर्द्रता 31 प्रतिशत दर्ज की गई, जो शाम तक घटकर 16 प्रतिशत रह गई थी, लेकिन बारिश के बाद उमस ने बेचैनी और बढ़ा दी।
रातें भी हुई गर्म, 28 डिग्री तक पहुंचा न्यूनतम पारा
गर्मी का असर केवल दिन तक सीमित नहीं है। इन दिनों रात के तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। गुना में सोमवार को न्यूनतम तापमान 28.0 डिग्री दर्ज किया गया। रात का पारा चढ़ने के कारण लोगों को कूलर और एसी के बाद भी चैन नहीं मिल रहा है। सूर्यास्त के घंटों बाद भी कंक्रीट के मकान तवे की तरह तप रहे हैं, जिससे रात के समय भी लू जैसा अहसास बना रहता है।
डॉक्टरों की सलाह: सावधानी ही बचाव
भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जिला अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, अचानक मौसम बदलने और उमस बढ़ने से डिहाइड्रेशन, सिरदर्द और घबराहट की शिकायतें बढ़ सकती हैं। दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें। यदि निकलना अनिवार्य हो, तो सूती कपड़े पहनें और पर्याप्त पानी पिएं। ओआरएस का घोल, नींबू पानी, और मौसमी फलों का सेवन करें। बासी भोजन से बचें क्योंकि उमस भरे मौसम में खाना जल्दी खराब होता है।
आगामी दिनों का अनुमान
मौसम विभाग की मानें तो आने वाले 48 घंटों में तापमान में विशेष गिरावट की उम्मीद नहीं है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर बन रहे दबाव के कारण कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ दोबारा बूंदाबांदी हो सकती है, जिससे उमस का ग्राफ और ऊपर जा सकता है। फिलहाल, गुना वासियों को सूर्य की इस तपिश और गर्म रातों से जल्द निजात मिलती नहीं दिख रही है।
भीषण गर्मी के चलते कक्षा नर्सरी से 8वीं तक के बच्चों के लिए 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित
जिले में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मद्देनजर बड़ा निर्णय लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिले के कक्षा नर्सरी से लेकर 8वीं तक के सभी विद्यालयों में 30 अप्रैल तक अवकाश घोषित कर दिया गया है। यह आदेश जिले के अंतर्गत संचालित होने वाले सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, मदरसा, सीबीएसई, नवोदय, केंद्रीय विद्यालय एवं शासन से मान्यता प्राप्त समस्त शिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होगा। विद्यार्थियों के लिए यह अवकाश 28 अप्रैल 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह अवकाश केवल छोटे बच्चों के लिए है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं पूर्व निर्धारित समय सारणी के अनुसार यथावत संचालित होती रहेंगी। साथ ही, शासन द्वारा पूर्व से निर्धारित परीक्षाएं और अन्य आवश्यक शैक्षणिक कार्यक्रम भी अपने तय समय पर ही संपन्न होंगे। विद्यार्थियों को अवकाश दिए जाने के बावजूद शिक्षकों और स्कूल स्टाफ को राहत नहीं दी गई है। आदेश के अनुसार समस्त शैक्षणिक स्टाफ और कार्यरत कर्मचारी प्रात: 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान वे विद्यालयीन कार्यों और विभागीय दायित्वों को पूर्ण करेंगे।