गुना में दूषित पानी का कहर!

25 से अधिक बच्चे उल्टी-दस्त के शिकार, 9 अभी भी भर्ती, जिला अस्पताल में मची अफरा-तफरी

गुना में दूषित पानी का कहर!
अस्पताल में भर्ती बच्चों से मिलने पहुंचे पार्षद प्रतिनिधि और नेता।

गुना। अनंत न्यूज़

शहर के बूढ़े बालाजी, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी और वार्ड नंबर 9 सहित आसपास के इलाकों में अचानक उल्टी-दस्त की बीमारी फैलने से हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ दिनों के भीतर ही 3 से 12 साल की उम्र के करीब 20 से 25 बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आई है। 
हालत गंभीर होने पर 8 से 10 बच्चों को तुरंत गुना जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है। कुछ बच्चों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, जबकि वर्तमान में 9 बच्चे अस्पताल में उपचाराधीन हैं। कुछ पीड़ितों ने निजी क्लीनिकों में भी अपना इलाज कराया है। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय निवासियों में भारी चिंता का माहौल है और लोग डर रहे हैं कि कहीं इंदौर के भागीरथपुरा जैसा गंभीर हादसा यहां भी न दोहरा जाए। परिजनों का पूरा ध्यान और आरोप क्षेत्र में होने वाली पानी की सप्लाई पर टिका हुआ है। पीड़ित बच्चों के माता-पिता का स्पष्ट कहना है कि पिछले करीब 15 दिनों से इलाके में लोग लगातार बीमार पड़ रहे हैं। परिजनों के मुताबिक, बच्चों ने अचानक पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत की, जिसके पीछे मुख्य वजह घरों में आने वाला गंदा और दूषित पानी है। हालांकि, बीमारी की असल वजह पूरी तरह पानी ही है या कुछ और, यह तो स्वास्थ्य विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद ही साफ हो सकेगा, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि क्षेत्र में कई जगह मुख्य पेयजल पाइपलाइन लीक है। अनुपयोगी और पुराने हो चुके नलों के जरिए नालियों का गंदा पानी रोजाना होने वाली वाटर सप्लाई में मिक्स हो रहा है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।

पार्षद प्रतिनिधि ने उठाए सवाल, पीएचई की बड़ी लापरवाही आई सामने
इस पूरे मामले में वार्ड 9 के पार्षद प्रतिनिधि लालाराम लोधा ने भी माना कि बूढ़े बालाजी और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में बड़े पैमाने पर बच्चों के बीमार होने की खबरें आ रही हैं। उन्होंने पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) विभाग के अधिकारियों से इस गंभीर स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले में पीएचई विभाग की एक बड़ी लापरवाही भी उजागर हुई है। अधिकारियों ने खुद स्वीकार किया है कि क्षेत्र की पानी की टंकी की सफाई पिछले करीब 4 महीने से नहीं हुई है। टंकी की नियमित सफाई न होना और पाइपलाइन में लीकेज की समस्या ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

अस्पताल पहुंचे नेता और प्रशासनिक अधिकारी, पानी के सैंपल लिए गए
सनसनीखेज मामले की जानकारी मिलते ही भाजपा नेता अनमोल सलूजा ने जिला अस्पताल पहुंचकर पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से चर्चा कर पूरे शहर की पानी टंकियों की नियमित सफाई कराने की मांग उठाई। देर शाम भाजपा जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिकरवार भी अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सीएमएचओ (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी) से बात कर बच्चों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए। सिकरवार ने बताया कि वार्ड 9 के अलावा वार्ड 14 और अन्य क्षेत्रों को मिलाकर अब तक 20 से 25 बच्चों के बीमार होने की जानकारी मिली है। पानी की जांच के लिए सैंपल भेजे जा चुके हैं, जिसकी रिपोर्ट एक-दो दिन में आ जाएगी।

नपा अधिकारी भी पहुंचे अस्पताल
मामले की गंभीरता को देखते हुए नगरपालिका के अधिकारी भी जिला अस्पताल पहुंचे और परिजनों से फीडबैक लिया। अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि संबंधित इलाकों से पानी के सैंपल लेकर जांच कराई जा रही है और लीकेज को सुधारने के लिए तुरंत टीमें भेजी जा रही हैं। फिलहाल डॉक्टर भी दूषित खानपान या पानी के कारण इंफेक्शन की आशंका जता रहे हैं, लेकिन वास्तविक कारणों की पुष्टि रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

कलेक्टर के निर्देश पर हरकत में आया प्रशासन

इस मामले की जानकारी जैसे ही कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के संज्ञान में आई, उन्होंने नगरपालिका प्रशासन को मामले की तत्काल जांच करने और आवश्यक कदम उठाने के कड़े निर्देश दिए। कलेक्टर के निदेर्शों के बाद नगरपालिका का अमला तुरंत हरकत में आया और जल प्रकोष्ठ प्रभारी ने कर्मचारियों की एक टीम को तत्काल मौके पर रवाना किया। टीम ने वार्ड के विभिन्न प्रभावित स्थानों पर पहुंचकर पानी के नमूने (सैंपल) एकत्रित किए। यह पूरी प्रशासनिक कार्रवाई वार्ड पार्षद सुमन लालाराम लोधा की प्रत्यक्ष उपस्थिति में संपन्न हुई। जांच और कार्रवाई के संबंध में जानकारी देते हुए जल प्रकोष्ठ प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान जो नमूने लिए गए हैं, उनमें शुरूआती तौर पर किसी प्रकार की दुर्गंध अथवा दृश्य अशुद्धता (गंदगी) नहीं पाई गई है और पानी देखने में सामान्य एवं स्वच्छ प्रतीत हुआ है। इसके बावजूद, किसी भी तरह की आशंका को दूर करने और पानी की वास्तविक गुणवत्ता की शत-प्रतिशत पुष्टि के लिए एकत्रित किए गए सभी नमूनों को गहन परीक्षण हेतु लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। इधर, बच्चों के स्वास्थ्य और जनसुरक्षा से जुड़े इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक प्रयोगशाला से आधिकारिक जांच प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्राप्त नहीं हो जाता, तब तक क्षेत्र की स्थिति पर लगातार और सतत निगरानी रखी जाए।