कलेक्टर के आदेश को भी ठेंगा ! 65 लाख की अस्पताल पर संकट, गड्ढे में निर्माण की तैयारी से ग्रामीणों में आक्रोश

कलेक्टर के आदेश को भी ठेंगा ! 65 लाख की अस्पताल पर संकट, गड्ढे में निर्माण की तैयारी से ग्रामीणों में आक्रोश
इस गड्ढे में बनाया जा रहा है स्वास्थ्य केंद्र

अनंत न्यूज़ @गुना। शासन की मंशा के मुताबिक ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए बमौरी ब्लॉक के ग्राम कुशेपुर में 65 लाख रुपए की लागत से उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण होना है। लेकिन, विडंबना यह है कि प्रशासनिक ढिलाई और राजस्व विभाग की अनदेखी के चलते यह प्रोजेक्ट विवादों के घेरे में आ गया है। आलम यह है कि जिस स्थान पर अस्पताल बनाने की तैयारी की जा रही है, वहाँ एक विशाल गड्ढा है, जिससे भविष्य में भवन के डूबने का खतरा बना हुआ है।

ग्रामीणों ने बताया कि इस अस्पताल के लिए जिला कलेक्टर ने 15 जुलाई 2025 को ही 4 बीघा जमीन स्वास्थ्य विभाग के नाम आवंटित कर दी थी। आदेश के मुताबिक, तहसीलदार को इस जमीन को राजस्व दस्तावेजों में दर्ज कर उसकी एक प्रति कलेक्ट्रेट भेजने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद 19 सितंबर 2025 को जिला स्वास्थ्य अधिकारी ने भी तहसीलदार को पत्र लिखकर जमीन का सीमांकन करने और स्वास्थ्य विभाग को कब्जा सौंपने की बात कही थी। तमाम आदेशों के बावजूद, महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक यह जमीन खसरे में स्वास्थ्य विभाग के नाम दर्ज नहीं की गई है। राजस्व विभाग की इस लेटलतीफी का खामियाजा अब पूरे गांव को भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों का सबसे बड़ा विरोध अस्पताल के प्रस्तावित स्थल को लेकर है। उनका आरोप है कि आवंटित जमीन को छोड़कर प्रशासन अब ऐसी जगह अस्पताल बनाने का प्रयास कर रहा है जहाँ गहरा गड्ढा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहाँ भवन बना, तो बारिश के दिनों में अस्पताल टापू बन जाएगा और मरीजों का वहाँ पहुँचना नामुमकिन होगा। कुशेपुर के निवासियों ने शासन और प्रशासन को कई बार आवेदन देकर मांग की है कि कलेक्टर द्वारा आरक्षित की गई 4 बीघा सुरक्षित जमीन को तत्काल खसरे में दर्ज किया जाए और सीमांकन कर निर्माण कार्य वहीं शुरू कराया जाए। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र को किसी गड्ढे या असुरक्षित स्थान पर नहीं बनने देंगे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन अपने ही आदेशों का पालन करवाने के लिए राजस्व विभाग पर क्या कार्रवाई करता है और कुशेपुर के ग्रामीणों को सुरक्षित अस्पताल की सौगात कब तक मिल पाती है।