आरोन के बारोद में पड़ोसियों की मारपीट से प्रताड़ित युवक ने जहर खाकर दी जान
नाराज परिजनों ने हनुमान चौराहे पर किया चक्काजाम, पुलिस पर लगाए आरोप
गुना। अनंत न्यूज़
आरोन थाना क्षेत्र के ग्राम बारोद में पड़ोसी किसानों के उत्पीड़न और पुलिस की लगातार मिल रही उपेक्षा से तंग आकर एक किसान युवक अशोक यादव ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने गुना के सबसे व्यस्ततम हनुमान चौराहे पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। परिजनों का दावा था कि पुलिस अगर सुनवाई कर लेती तो अशोक को जहर खाने की नौबत नहीं आती।
जानकारी के अनुसार, ग्राम बारोद निवासी अशोक यादव का अपने पड़ोसी किसानों के साथ खेत की मेढ़ को लेकर लंबे समय से गंभीर विवाद चल रहा था। विवाद तब और बढ़ गया जब कुछ दिनों पहले रंजिशन आरोपियों ने खेत की असली मेढ़ के पास एक और नई अवैध मेढ़ खड़ी कर दी। जब अशोक यादव ने इस अवैध कब्जे का कड़ा विरोध किया, तो दबंग पड़ोसी किसानों ने उनके साथ अमानवीय और बर्बरतापूर्वक मारपीट की। इस खूनी हमले में अशोक यादव गंभीर रूप से घायल हो गए थे। परिजनों का कहना है कि इस घटना के बाद भी आरोपियों के हौसले बुलंद थे और करीब 4-5 दिन पहले इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में दोबारा तीखी बहस और गाली-गलौज हुई थी।
थानों के चक्कर काटता रहा पीड़ित, पुलिस ने नहीं की सुनवाई
परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि पहली मारपीट और दोबारा मिली धमकियों के बाद पीड़ित पक्ष द्वारा इस पूरे मामले की लिखित शिकायत आरोन थाने में दर्ज कराई गई थी। परिजनों ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि अशोक केवल आरोन थाने ही नहीं, बल्कि अपनी गुहार लेकर राघौगढ़ तक के चक्कर काटने गया था। हर जगह से उसे केवल आश्वासन और दुत्कार मिली। लगातार मिल रही जान से मारने की धमकियों, समाज में हुए अपमान और कहीं भी सुनवाई न होने के कारण अशोक गहरे मानसिक तनाव में चले गए थे। इसी मानसिक संताप से क्षुब्ध होकर आखिरकार बुधवार को उन्होंने अपने ही खेत पर जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया।
अस्पताल की लापरवाही और जिला अस्पताल में मौत
जहर खाने के बाद जब अशोक की हालत बिगड़ने लगी, तो बदहवास परिजन उन्हें तुरंत आरोन सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन यहां भी व्यवस्थाओं ने दम तोड़ दिया। परिजनों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल में मौजूद ड्यूटी डॉक्टरों ने घोर लापरवाही बरतने हुए समय पर अशोक का आपातकालीन उपचार शुरू ही नहीं किया, जिससे जहर उनके पूरे शरीर में फैल गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। आरोन अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए प्राथमिक उपचार के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की और युवक को मरणासन्न हालत में गुना जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में भी तमाम कोशिशों के बावजूद बुधवार शाम करीब 6:30 बजे उपचार के दौरान अशोक यादव ने दम तोड़ दिया।
ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव रख हनुमान चौराहे पर चक्काजाम, फंसी फायर ब्रिगेड
गुरुवार दोपहर जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद अशोक का शव परिजनों को सौंपा गया, वैसे ही पीड़ित परिवार और बारोद गांव से आए सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। इंसाफ की मांग को लेकर परिजन शव को एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में लादकर सीधे गुना शहर के हृदय स्थल 'हनुमान चौराहा' पहुंच गए और बीच सड़क पर वाहन खड़ा करके चक्काजाम कर दिया। मृतक की बहन ने रोते हुए पुलिस पर संगीन आरोप लगाए कि आरोपियों ने अशोक को उसके घर के भीतर से जबरन बाहर निकाला और सरेआम बेरहमी से पीटा था। बहन ने चीखते हुए कहा, अगर पुलिस समय रहते हमारी एक छोटी सी सुनवाई कर लेती, तो आज मेरा भाई जिंदा होता। पुलिस की लापरवाही ने मेरे भाई की जान ली है। परिजनों का दावा था कि इस पूरी वारदात में 10 से 11 लोग शामिल थे, जिन पर तत्काल हत्या और प्रताड़ना की एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। इस अचानक हुए उग्र चक्काजाम के कारण हनुमान चौराहे के चारों ओर वाहनों के पहिए थम गए और दोनों तरफ कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आपातकालीन ड्यूटी पर जा रही एक फायर ब्रिगेड भी इस भीषण जाम के बीच काफी देर तक फंसी रही।
कैंट और आरोन पुलिस ने दी समझाइश
शहर के मुख्य चौराहे पर चक्काजाम और कानून व्यवस्था बिगड़ने की सूचना मिलते ही कैंट थाना प्रभारी अनूप भार्गव अपनी टीम के साथ और उनके साथ आरोन पुलिस के आला अधिकारी तत्काल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि आरोपियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के इस ठोस आश्वासन और निष्पक्ष जांच के वादे के बाद परिजन शांत हुए और चक्काजाम समाप्त कर शव को ट्रैक्टर-ट्रॉली से लेकर अपने गृह ग्राम बारोद के लिए रवाना हुए।