मुक्तिधाम के विवाद में मीना-लोधा समाज आमने-सामने, चौराहे पर चक्काजाम

जनसुनवाई में उपेक्षा से भड़का ग्रामीणों का आक्रोश

मुक्तिधाम के विवाद में मीना-लोधा समाज आमने-सामने, चौराहे पर चक्काजाम

गुना। अनंत न्यूज़

प्रशासनिक उदासीनता और जनसुनवाई में सुनवाई न होने से आक्रोशित ग्रामीणों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा। एक तरफ जहां मुक्तिधाम की जमीन पर कब्जे और मारपीट की घटना से आहत ग्रामीणों ने शहर के व्यस्ततम हनुमान चौराहे पर अचानक चक्काजाम कर प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से जर्जर सड़क की मार झेल रहे ग्रामीणों ने भी कलेक्ट्रेट पहुंचकर उग्र आंदोलन और मानवाधिकार आयोग जाने की चेतावनी दी।

मुक्तिधाम पर अवैध कब्जे और ग्रामीणों के साथ मारपीट के विरोध में भूरा चक सिलावटी के लोधा समाज ने जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि पड़ोसी गांव पांचोरा के दबंग मीना समाज ने उनके 40 साल पुराने मुक्तिधाम की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं। हाल ही में गांव की एक युवती का निधन होने पर वहां अंतिम संस्कार किया गया था, जहाँ से कब्जे की नीयत से अर्थी की अस्थियां तक चोरी कर ली गईं। मामले की शिकायत और कार्रवाई की मांग को लेकर 18 जुलाई को प्रशासनिक टीम भी मौके पर पहुँची थी, लेकिन इसके बाद भी दबंगों के हौसले पस्त नहीं हुए और उन्होंने भूरा चक सिलावटी के दो ग्रामीणों के साथ बेदर्दी से मारपीट कर दी। पीड़ित ग्रामीणों का दावा है कि वे न्याय की गुहार लेकर कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में पहुँचे थे, लेकिन जब जिÞम्मेदार अधिकारियों ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं सुना, तो मजबूरन उन्हें शहर के प्रमुख हनुमान चौराहे पर जाम लगाना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान पीड़ितों को सड़क पर ही लिटा दिया गया। ग्रामीणों ने उनके जख्म दिखाते हुए दावा किया कि बुरी तरह घायल होने के बावजूद पुलिस ने सही कार्रवाई नहीं की है। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों की आॅटो चालकों और सड़क से गुजर रहे अन्य वाहन सवारों से तीखी बहस भी हुई।

पुलिस अधिकारियों ने संभाला मोर्चा, दो समाजों में क्रॉस प्रकरण दर्ज

हनुमान चौराहे पर अचानक किए गए चक्काजाम से वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और आक्रोशित लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस की समझाइश और निष्पक्ष कार्रवाई के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त किया, जिसके बाद यातायात बहाल हो सका। मौके पर पहुँचे पुलिस अधिकारियों ने खुलासा किया कि यह पूरा विवाद मीना और लोधा समाज के बीच हुआ है, जिसमें पुलिस द्वारा दोनों पक्षों की ओर से क्रॉस मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

जर्जर सड़क से परेशान 5 गांवों का गुस्सा, आंदोलन की चेतावनी

उधर, कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में केंट-आरोन मार्ग की बदहाली को लेकर भी ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। गुलाबगंज से आरोन जाने वाली और कैंट खैजरा रोड की दुर्दशा से परेशान 4 से 5 गांवों के निवासियों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। करीब 50 से अधिक गांवों को जोड़ने वाली इस मुख्य सड़क के 5-6 वर्षों से जर्जर रहने के कारण राहगीरों और स्कूली बच्चों का निकलना दूभर हो गया है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से निराश ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि बारिश के मौसम में यहां रोज हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण या मरम्मत शुरू नहीं कराई गई, तो वे मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे और व्यापक स्तर पर आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।