इंसुलिन देने पर स्कूल को एतराज! मासूम की बीमारी का मजाक उड़ाकर थमाई टीसी: बाल कल्याण समिति ने अल्फा स्कूल में दी दबिश

इंसुलिन देने पर स्कूल को एतराज!  मासूम की बीमारी का मजाक उड़ाकर थमाई टीसी: बाल कल्याण समिति ने अल्फा स्कूल में दी दबिश
स्कूल प्रबंधन से चर्चा करतीं बाल कल्याण समिति की सदस्य।

अनंत न्यूज़ @गुना। शहर के दलवी कॉलोनी स्थित अल्फा स्कूल प्रबंधन की एक बेहद अमानवीय और संवेदनहीन कार्यप्रणाली सामने आई है। स्कूल ने एक 6 वर्षीय मासूम छात्रा को महज इसलिए स्कूल से निकाल दिया क्योंकि वह 'टाइप-1 डायबिटीज' से पीड़ित है और उसे स्कूल समय में इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। इस मामले की गूँज भोपाल तक पहुँचने के बाद बुधवार को बाल कल्याण समिति की टीम ने पुलिस और शिक्षा विभाग के साथ स्कूल पहुंचकर जांच पड़ताल की।

भगत सिंह कॉलोनी निवासी दिलीप थापर, जो जोमेटो कंपनी में डिलीवरी बॉय के रूप में कार्यरत हैं, की 6 वर्षीय बेटी इशिता गंभीर डायबिटीज से पीड़ित है। उसे दिन में कई बार इंसुलिन देना पड़ता है और शुगर की जांच करनी होती है। चूंकि बच्ची बहुत छोटी है, इसलिए पिता को हर रोज स्कूल जाकर उसे इंसुलिन देना और खाना खिलाना पड़ता है। दिलीप का आरोप है कि दाखिले के समय स्कूल संचालक जॉय वर्गीस ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया था, लेकिन कुछ माह बाद ही प्रबंधन ने इस मानवीय प्रक्रिया में रोक-टोक और प्रताड़ना शुरू कर दी। हद तो तब हो गई जब वार्षिक परीक्षा खत्म होते ही बदले की भावना से स्कूल ने इशिता (6) और उसकी बड़ी बहन लेशाना (14) का नाम स्कूल से काटकर उन्हें टीसी थमा दी।

गरीबी और मजबूरी का उड़ाया मजाक

पीड़ित पिता ने रुंधे गले से आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूरी का मजाक उड़ा रहा है। समय पर फीस भरने के बावजूद स्कूल संचालक ने उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को धूमिल किया और दोनों बेटियों के भविष्य को अधर में डाल दिया है। इस मामले में पहले भी कलेक्टर और सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की गई थी, लेकिन तब प्रशासन की हिदायत के बाद भी स्कूल प्रबंधन के हौसले पस्त नहीं हुए।

सीडब्ल्यूसी की टीम ने घेरा स्कूल, जांच शुरू

मामला सुर्खियों में आने के बाद बुधवार को बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. नीरू शर्मा, सदस्य अनुसुइया रघुवंशी और अन्य सदस्यों की टीम अल्फा स्कूल पहुंची। टीम के साथ पुलिस बल और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। जांच टीम ने स्कूल के प्रिंसिपल और स्टाफ से लंबी पूछताछ की और दस्तावेजों को खंगाला। डॉ. नीरू शर्मा (अध्यक्ष, सीडब्ल्यूसी) ने बताया कि "एक बीमार बच्ची के साथ इस तरह का व्यवहार और उसे शिक्षा के अधिकार से वंचित करना गंभीर मामला है। हमने हर पहलू पर जांच की है और जल्द ही इसका विस्तृत प्रतिवेदन बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।