नगरीय प्रशासन आयुक्त के कड़े आदेश के बाद गुना में मची हलचल
नपाध्यक्ष ने प्रभारी सीएमओ को थमाया नोटिस, अब हर आदेश और दस्तखत माना जाएगा वित्तीय कदाचार
गुना।अनंत न्यूज़
मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में पिछले लंबे समय से शासन के नियमों और कैडर व्यवस्था को ताक पर रखकर बांटे जा रहे मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के अतिरिक्त प्रभारों पर राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक चाबुक चलाया है। संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास के आयुक्त कैलाश वानखेड़े द्वारा जारी एक अत्यंत कड़े और दो टूक आदेश ने पूरे प्रदेश सहित गुना के प्रशासनिक हलके में भारी हड़कंप मचा दिया है।
आयुक्त द्वारा जारी आदेश के तहत, विभागीय फीडर कैडर और निर्धारित पदक्रम के बाहर के किसी भी अन्य विभाग या संवर्ग के अधिकारी को दिए गए सीएमओ, यंत्री और वित्त अधिकारी के तमाम अतिरिक्त प्रभारों को तत्काल प्रभाव से निरस्त (शून्य) घोषित कर दिया गया है। इस आदेश के आते ही गुना नगर पालिका में पिछले 13 महीनों से चल रही प्रशासनिक व्यवस्था ढह गई है। आदेश के तुरंत बाद गुना नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने कड़ा रुख अपनाते हुए प्रभारी सीएमओ व डिप्टी कलेक्टर मंजुषा खत्री को तत्काल पद छोड़ने और आगे कोई भी शासकीय कार्य न करने का लिखित नोटिस थमा दिया है।
आयुक्त के आदेश से नियम विरुद्ध प्रभार तत्काल प्रभाव से शून्य
नगरीय प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार, सीएमओ के रिक्त पदों की पूर्ति केवल और केवल उसी संवर्ग के नियमित अधिकारी या तय फीडर कैडर (जैसे राजस्व अधिकारी, कार्यालय अधीक्षक, राजस्व निरीक्षक, सहायक वर्ग-01) से ही की जा सकती है। इस संबंध में विभाग द्वारा पूर्व में भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिसके उल्लंघन पर टीकमगढ़ के एक मामले में उच्च न्यायालय जबलपुर ने जिला कलेक्टर पर 10 हजार रुपये का जुमार्ना तक लगाया था। इसके बावजूद गुना नगर पालिका में पिछले 13 महीनों से (22 अप्रैल 2025 से) नियम विरुद्ध तरीके से प्रशासनिक सेवा की डिप्टी कलेक्टर को सीएमओ का अतिरिक्त प्रभार सौंप रखा था। आयुक्त कैलाश वानखेड़े ने अपने नए आदेश में स्पष्ट चेताया है कि निर्धारित फीडर कैडर के अलावा यदि कोई भी अन्य अधिकारी इस पद पर कार्य करता है, तो उसे वित्तीय अनियमितता माना जाएगा और उसके द्वारा किए गए समस्त वित्तीय लेनदेन वैधानिक रूप से अमान्य होंगे।
नपाध्यक्ष का दो टूक नोटिस: कार्य किया तो स्वयं होंगी जिम्मेदार
इस कड़े प्रादेशिक आदेश को ढाल बनाकर गुना नपाध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने पत्र क्रमांक 1517 जारी कर सीधे प्रभारी सीएमओ व डिप्टी कलेक्टर मंजुषा खत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नपाध्यक्ष ने अपने पत्र में स्पष्ट लिखा है कि आयुक्त के आदेशानुसार फीडर कैडर से बाहर होने के कारण आपका सीएमओ का अतिरिक्त प्रभार तत्काल प्रभाव से निरस्त हो चुका है। अत: यदि इस आदेश के बाद भी आप सीएमओ के पद पर किसी भी प्रकार का कार्य, हस्ताक्षर या वित्तीय संचालन करती हैं, तो वह सीधे कदाचार और वित्तीय गड़बड़ी की श्रेणी में आएगा, जिसकी समस्त वैधानिक व व्यक्तिगत जवाबदारी आपकी स्वयं की होगी।
जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करने और मनमानी के गंभीर आरोप
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पार्षदों के अनुसार, पिछले एक साल से गुना नगर पालिका में अघोषित तानाशाही का माहौल बना हुआ था। प्रभारी सीएमओ द्वारा नपा परिषद और अध्यक्ष को दरकिनार कर, बिना उनकी सहमति के मनमाने आदेश जारी किए जा रहे थे। हालात इतने बदतर थे कि करोड़ों रुपये के भुगतान बिना जनप्रतिनिधियों की अनुमति के कर दिए गए और पूरी नगर पालिका का संचालन संविदा कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया था। प्रभारी अधिकारी के हफ्ते में महज दो-तीन दिन, वह भी शाम को कुछ देर के लिए दफ्तर आने के कारण आम जनता साफ-सफाई, ठप्प पड़े निर्माण कार्यों, नामांतरण और टेंडरों के लिए महीनों से दफ्तर के चक्कर काट रही थी। यहां तक कि पार्षदों के फोन उठाना तक बंद कर दिया गया था और शासकीय दस्तावेजों पर अलग-अलग हस्ताक्षर करने जैसे गंभीर प्रशासनिक घालमेल के मामले भी सामने आ रहे थे।