गुनिया के जीर्णोद्वार में अतिक्रमण सबसे बड़ा कांटा

साल भर बाद भी नहीं बदले हालात, अब 'पार्ट-3' के निरीक्षण में कलेक्टर ने स्वीकारी हकीकत

गुनिया के जीर्णोद्वार में अतिक्रमण सबसे बड़ा कांटा
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से चर्चा करते कलेक्टर।

गुना।अनंत न्यूज़

 शहर की जीवनदायिनी गुनिया नदी को उसके पुराने अस्तित्व में लौटाने के लिए जिला प्रशासन एक बार फिर मैदान में उतरा है। स्वच्छता एवं कायाकल्प अभियान के तीसरे चरण (पार्ट-3) के तहत रविवार को कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने प्रशासनिक अमले के साथ बड़ा पुल से लगभग डेढ़ किलोमीटर तक पैदल निरीक्षण किया। हालांकि, इस निरीक्षण ने प्रशासन के पिछले दावों और कार्रवाइयों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। खुद कलेक्टर ने यह स्वीकार किया है कि नदी के बहाव क्षेत्र और किनारों पर कई नए अतिक्रमण सामने आए हैं, जो नदी के संरक्षण में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरे हैं।

गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने साल 2025 में भी गुनिया नदी को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए एक वृहद अभियान चलाया था। उस समय प्रशासन की जेसीबी ने नदी किनारे बने कई अवैध निमार्णों को ढहाया था और यह दावा किया गया था कि नदी को पुनर्जीवित किया जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अतिक्रमण कम होने के बजाय समय के साथ बढ़ते ही चले गए। निरीक्षण के दौरान नए अतिक्रमणों का मिलना यह दशार्ता है कि या तो पूर्व में की गई कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी या फिर अतिक्रमणकारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें प्रशासन का कोई डर नहीं है। इस मुद्दे पर गुना विधायक पन्नालाल शाक्य भी कई बार चिंता जता चुके हैं और संकेत दे चुके हैं कि जब तक अतिक्रमण नहीं हटेंगे, गुनिया का उद्धार संभव नहीं है। कलेक्टर ने अब सख्त लहजा अपनाते हुए नगरपालिका अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जून में मानसून की शुरूआत से पहले इन मुख्य अतिक्रमणों को पूरी तरह हटाया जाए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर अखिलेश कुमार जैन, एसडीएम गुना शिवानी पांडे, सीएमओ मंजुषा खत्री, तहसीलदार जी.एस. बैरवा सहित अन्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्षा ऋतु से पूर्व नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करना उनकी प्राथमिकता है।

गंदगी फैलाने वालों पर डिजिटल स्ट्राइक, वीडियो भेजने पर मिलेगा सम्मान

स्वच्छता को लेकर प्रशासन ने एक अनूठी पहल शुरू की है। नदी और नालों में कचरा फेंकने वालों पर लगाम कसने के लिए अब आम नागरिकों की मदद ली जाएगी। कलेक्टर ने शहरवासियों से आग्रह किया है कि यदि कोई भी व्यक्ति नदी के आसपास कचरा फेंकता या गंदगी फैलाता दिखे, तो उसका वीडियो या फोटो बनाकर प्रशासन को भेजें। ऐसे जागरूक नागरिकों को न केवल प्रोत्साहित किया जाएगा, बल्कि उन्हें सम्मानित भी किया जाएगा। वहीं, गंदगी फैलाने वालों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जनभागीदारी की सुखद तस्वीर

निरीक्षण के दौरान एक सकारात्मक पहलू भी सामने आया। एक स्थानीय किसान ने नदी क्षेत्र में जमा कचरे के ढेर को स्वयं के खर्च पर हटाने का संकल्प लिया। इसके अलावा कुछ अन्य रहवासियों ने भी स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग की सहमति दी है। कलेक्टर ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आपका शहर, आपकी जिम्मेदारी के भाव के साथ ही जल स्रोतों का संरक्षण संभव है।

30 अप्रैल को पेश होगी भविष्य की रूपरेखा

गुनिया नदी के स्थायी संरक्षण के लिए प्रशासन अब दीर्घकालीन योजना पर काम कर रहा है। आगामी 30 अप्रैल को इस परियोजना की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) शहरवासियों और विभिन्न हितधारकों के समक्ष रखी जाएगी। इसके बाद अभियान का चौथा चरण शुरू होगा, जो नदी के सौंदर्यीकरण पर केंद्रित होगा। प्रशासन का प्रयास केवल गुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि कूनो नदी और भुजरिया तालाब के संरक्षण को लेकर भी कार्ययोजना तैयार की जा रही है।