आंगनवाड़ी भर्ती में बाबू का 'नाम बदलो' खेल!

रिश्वत के फेर में कलेक्टर ने किया सस्पेंड, जनसुनवाई में बुलाकर महिला को सौंपा नियुक्ति पत्र

आंगनवाड़ी भर्ती में बाबू का 'नाम बदलो' खेल!
सहायिका को नियुक्ति पत्र देते हुए कलेक्टर।

गुना। अनंत न्यूज़

सरकारी दफ्तरों में फाइलों के भीतर 'नाम' का खेल कितना भारी पड़ सकता है, इसकी एक बानगी गुना जिले में देखने को मिली है। महिला एवं बाल विकास विभाग के एक बाबू ने न केवल चयनित महिलाओं के नाम बदलने की हिम्मत दिखाई, बल्कि नियुक्ति पत्र (ज्वाइनिंग लेटर) को अपनी जेब की जागीर समझकर रिश्वत का जरिया भी बना लिया। हालांकि, कलेक्टर की सतर्कता ने इस 'सिस्टम के दीमक' को बेनकाब कर दिया है।
मामला एकीकृत बाल विकास परियोजना राघौगढ़ और मधुसूदनगढ़ का है। नियमानुसार, सेक्टर ग्रामीण-01 के नांदनेर तरी केंद्र पर पूजा कुशवाह और मधुसूदनगढ़ के तिलक चौक वार्ड क्रमांक-04 में रानी सेन का सहायिका पद के लिए अनंतिम चयन हुआ था। सरकारी आदेश की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-03 विजय कुमार मेहरा ने अपना खेल शुरू कर दिया। आरोप है कि मेहरा ने नस्ती (फाइल) में शातिर तरीके से हेरफेर करते हुए पूजा कुशवाह के स्थान पर पूनम कुशवाह और रानी सेन के स्थान पर रजनी सेन का नाम दर्ज कर दिया। इस जालसाजी का मकसद अपात्र लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाकर वरिष्ठ अधिकारियों से गुपचुप अनुमोदन प्राप्त करना था।

महिला से कहा-कलेक्टर साहब के पास है फाइल
इस कहानी में मोड़ तब आया जब असली हकदार रानी सेन अपने नियुक्ति पत्र के लिए दफ्तर के चक्कर काटने लगीं। आरोप है कि बाबू मेहरा ने रानी को यह कहकर गुमराह किया कि "आपका ज्वाइनिंग लेटर तो कलेक्टर साहब के पास है।" इसी बीच, पर्दे के पीछे से नियुक्ति के बदले 25 हजार रुपए की रिश्वत की मांग की गई। रानी सेन ने इस अन्याय के सामने झुकने के बजाय सीधे कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल की चौखट पर दस्तक दी। शिकायत मिलते ही कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझा और तत्काल महिला बाल विकास अधिकारी को जांच के आदेश दिए। जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो गया और बाबू की पूरी करतूत उजागर हो गई।

जब दफ्तर बुलाकर खुद कलेक्टर ने सौंपा लेटर
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने मंगलवार को पीड़ित महिला रानी सेन को अपने कार्यालय बुलाया। कलेक्टर ने न केवल उन्हें अपने हाथों से नियुक्ति पत्र सौंपा, बल्कि उनका उत्साहवर्धन करते हुए भविष्य में ईमानदारी से काम करने की प्रेरणा भी दी। नियुक्ति पत्र पाकर रानी सेन के चेहरे पर जो मुस्कान आई, उसने सिस्टम की सड़न पर ईमानदारी की जीत की मुहर लगा दी।

अनुकंपा के बाद बाबू ने पूरी नहीं की शर्तें
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दूसरों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले विजय कुमार मेहरा खुद नियमों की धज्जियां उड़ा रहे थे। मेहरा की नियुक्ति अनुकंपा आधार पर हुई थी, जिसमें शर्त थी कि उन्हें 3 वर्ष के भीतर सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रमाणपत्र देना होगा। विभाग ने 2019, 2021 और 2025 में बार-बार नोटिस दिए, लेकिन साहब ने आदेशों को ठेंगे पर रखा।

कलेक्टर बोले- निष्पक्षता से समझौता नहीं
कलेक्टर ने विजय कुमार मेहरा को पदीय कर्तव्यों में लापरवाही, भ्रष्टाचार के आरोपों और वरिष्ठों की अवहेलना के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जिला कार्यालय महिला एवं बाल विकास विभाग रहेगा। कलेक्टर कन्याल ने दो टूक चेतावनी दी है कि जिले में सरकारी नियुक्तियों में पारदर्शिता और निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि भविष्य में किसी भी विभाग में इस तरह की 'नाम बदलो' स्कीम या रिश्वतखोरी की शिकायत मिली, तो दोषियों के विरुद्ध इससे भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।