तीन कोचिंग संस्थान सील, भगोड़े साबित हुए अफसर बनाने का दावा करने वाले कोचिंग माफिया!

गुना के कोचिंग संस्थान पर न अग्निशमन यंत्र, न ही मिले सुरक्षा उपकरण

तीन कोचिंग संस्थान सील, भगोड़े साबित हुए अफसर बनाने का दावा करने वाले कोचिंग माफिया!
कमियां पाए जाने पर सील कर दी कोचिंग।

गुना। अनंत न्यूज़

उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए हालिया हादसे के बाद गुना कलेक्टर किशोर कुमार के कड़े रुख के चलते गुरुवार देर शाम स्थानीय प्रशासन ने शहर के कोचिंग सेंटरों पर एक बड़ी स्ट्राइक की। इस कार्रवाई ने गुना के उन बड़े और नामी कोचिंग संचालकों की कलई खोलकर रख दी है, जो बंद कमरों में हजारों छात्र-छात्राओं को डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस और आईपीएस बनाने जैसे बड़े-बड़े सपने बेचते हैं, लेकिन जब खुद कानून और सुरक्षा नियमों का पालन करने की बारी आई, तो वे प्रशासन की टीम को देखते ही ताले लटकाकर रफूचक्कर हो गए।

कलेक्टर के सख्त निर्देश पर गुरुवार देर शाम राजस्व, नगरपालिका, शिक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने शहर के व्यस्ततम बस स्टैंड क्षेत्र और तेलघानी क्षेत्र में संचालित कोचिंग संस्थानों पर अचानक दबिश दी। इस संयुक्त टीम का मुख्य उद्देश्य कोचिंग संस्थानों में बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था, आगजनी से बचाव के पुख्ता इंतजाम, आपातकालीन निकास और बिजली के उपकरणों की सुरक्षा स्थिति का गहन जायजा लेना था। प्रशासनिक टीम ने जैसे ही औचक निरीक्षण शुरू किया, वैसे ही शिक्षा के नाम पर व्यापार कर रहे संचालकों में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान संयुक्त टीम ने जब करीब 7 से 8 प्रमुख संस्थानों पर दबिश दी, तो वहां का नजारा बेहद भयावह और चौकाने वाला था। छात्रों के जीवन के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा था। किसी भी संस्थान के पास न तो अनिवार्य फायर एनओसी थी और न ही आग बुझाने के लिए कोई अग्निशमन यंत्र मौजूद थे। हद तो तब हो गई जब देखा गया कि कई परिसरों में हाई वोल्टेज बिजली के नंगे और खुले तार मकड़जाल की तरह लटक रहे थे, जो कभी भी किसी बड़ी अनहोनी को न्योता दे सकते थे।

इन संस्थानों पर की गई कार्रवाई

गंभीर लापरवाही पाए जाने पर टीम ने तत्काल सख्त रुख अपनाते हुए शहर के तीन बड़े और नामी कोचिंग संस्थानों कैरियर पॉवर, चरित्रम और माइल स्टोन को मौके पर ही सील कर दिया। इन संस्थानों को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए जल्द से जल्द सभी जरूरी सुरक्षा उपकरण जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा कुछ संस्थान 3 और 4 मंजिला इमारतों के तलघर में संचालित पाए गए। जहां आगजनी जैसी विपरीत परिस्थिति में बचाव का वैकल्पिक रास्ता तक तक नहीं था।

कायरों की तरह भागे कोचिंग संचालक

हैरानी और शर्म की बात यह है कि जैसे ही इस प्रशासनिक कार्रवाई की भनक शहर के अन्य कोचिंग सेंटरों को लगी, तो गुना के कई अन्य नामी और बड़े कोचिंग संस्थानों के संचालक जिला प्रशासन की संयुक्त टीम का सामना करने की हिम्मत तक नहीं जुटा सके। वे आनन-फानन में अपने सेंटरों को बीच में ही बंद कर और ताले डालकर मौके से भाग खड़े हुए। यह भगदड़ साफ बयां करती है कि इन तथाकथित प्रतिष्ठित संस्थानों के भीतर सुरक्षा के नाम पर कितनी बड़ी कमियां और झोल छिपे हुए हैं। जिन संचालकों पर हजारों बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी है, वे खुद इतने गैर-जिम्मेदार निकले कि अपनी कमियों को छुपाने के लिए कायरों की तरह भागना बेहतर समझा।

टीम ने दी दो टूक चेतावनी

इस पूरी कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन की टीम ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि उनका मुख्य फोकस केवल संस्थानों को बंद करना नहीं, बल्कि वहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। प्रशासन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि शहर में किसी भी सूरत में दिल्ली या लखनऊ जैसे हादसों की पुनरावृत्ति नहीं होने दी जाएगी और दुर्घटना की हर छोटी-बड़ी आशंका को पूरी तरह टाला जाएगा। जो संस्थान तय मानकों को पूरा नहीं करेंगे, उन्हें गुना में पैर पसारने की इजाजत बिल्कुल नहीं होगी। प्रशासन की इस कड़क कार्रवाई से शहर के कोचिंग माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं अभिभावकों ने इस कदम की सराहना की है।