माचलपुर में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र रैकेट का खुलासा, 6 आरोपी गिरफ्तार — स्वास्थ्य विभाग भी सख्त
अनंत न्यूज़ @राजगढ़ | जिले के माचलपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करते हुए जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से अवैध तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे थे।
यह पूरी कार्रवाई पुलिस कप्तान अमित तोलानी (IPS) के निर्देशन में की गई। मामले की शुरुआत तब हुई जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जीरापुर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. सुनील चौरसिया ने संदिग्ध जन्म प्रमाण पत्रों को लेकर शिकायत दर्ज कराई।
जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी अर्जुन बैरागी, जो रामगढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत था, उसने सिस्टम का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए।
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह रहा कि फरवरी 2026 में जब PHC रामगढ़ में एक भी डिलीवरी नहीं हुई, तब भी आरोपी द्वारा 137 जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए। इतना ही नहीं, कई प्रमाण पत्र ऐसे लोगों के बनाए गए जो अन्य राज्यों—राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और सिक्किम—से संबंधित हैं।
जांच में यह भी पाया गया कि कई प्रमाण पत्र 1950 से 1980 के बीच के बनाए गए, जबकि उस समय उस स्वास्थ्य केंद्र में डिलीवरी की सुविधा ही उपलब्ध नहीं थी। इसके अलावा 1 अप्रैल 2007 के पहले के प्रमाण पत्र भी जारी किए गए, जो नियमों के विरुद्ध है।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे आधार कार्ड में नाम और जन्मतिथि संशोधन कराने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करते थे। इसके लिए लोकसेवा केंद्र, आधार सेंटर और एमपी ऑनलाइन संचालकों के माध्यम से ग्राहकों को जोड़ा जाता था। ग्राहकों की जानकारी व्हाट्सएप के जरिए भेजी जाती थी और बिना किसी वैध दस्तावेज के CRS पोर्टल पर एंट्री कर प्रमाण पत्र जारी कर दिए जाते थे।
गिरोह प्रति प्रमाण पत्र 500 से 1000 रुपये तक वसूलता था। मुख्य आरोपी ने करीब 250 फर्जी प्रमाण पत्र बनाना और लगभग 35 हजार रुपये की अवैध कमाई करना स्वीकार किया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से फर्जीवाड़े में इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और PHC रामगढ़ का कंप्यूटर सिस्टम जब्त किया है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
राजगढ़ पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार के फर्जी दस्तावेज बनवाने से बचें, क्योंकि यह दंडनीय अपराध है और इसमें कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती है।
इस पूरे मामले ने सरकारी सिस्टम की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन पर अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।