घोष की गूंज में राष्ट्रभाव का संदेश, राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ मध्यभारत प्रांत घोष वर्ग का भव्य समापन

“स्व” का भाव ही समाज परिवर्तन का आधार : डॉ. राजेश सेठी

घोष की गूंज में राष्ट्रभाव का संदेश, राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ  मध्यभारत प्रांत घोष वर्ग का भव्य समापन

गुना | अनंत न्यूज़ 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यभारत प्रांत के 15 दिवसीय घोष वर्ग का प्रकट कार्यक्रम एवं समापन समारोह शुक्रवार को गुरुदेव पब्लिक स्कूल परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में घोष साधकों द्वारा सामूहिक घोष प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। स्वयंसेवकों ने घोष की मधुर धुनों के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आकृति बनाकर विशेष आकर्षण प्रस्तुत किया।

समारोह के मुख्य वक्ता माध्यभारत प्रान्त के सह प्रान्त संघ चालक डॉ. राजेश सेठी ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र के प्रति “स्व” का भाव रखना होगा, तभी समाज परिवर्तन संभव है। उन्होंने कहा कि “स्व” का अर्थ अपने देश पर गर्व, अपनी संस्कृति पर मान और अपने पूर्वजों पर अभिमान है। संघ ने इसी भावना को अपने “पंच परिवर्तन” में प्रमुख स्थान दिया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय भारत का अमृतकाल है और देश पुनः विश्वगुरु बनने की दिशा में अग्रसर है। प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र निर्माण में गिलहरी के समान योगदान देना चाहिए। केवल “भारत माता की जय” कहना पर्याप्त नहीं, बल्कि उसे अपने व्यवहार और जीवन में उतारना भी आवश्यक है।

डॉ. सेठी ने कहा कि भारत ने कभी शक्ति के बल पर किसी राष्ट्र को नहीं जीता, बल्कि अपने संस्कारों और मानवीय मूल्यों से विश्व को दिशा दी है। आज पूरा विश्व भारत की ओर आशा भरी दृष्टि से देख रहा है और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का मंत्र वैश्विक स्तर पर गूंज रहा है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आचार्य विनय गोस्वामी ने राष्ट्र धर्म को सर्वोच्च धर्म बताते हुए कहा कि यदि समाज राष्ट्र धर्म को धारण कर ले, तो कोई भी शक्ति देश का अहित नहीं कर सकती। उन्होंने घोष की व्याख्या करते हुए कहा कि घोष कंठ से निकला दिव्य स्वर है तथा भगवान शंकर का डमरू भी घोष का ही स्वरूप है।

मंच पर विभाग संघचालक अशोक सिंह कुशवाह एवं जिला संघचालक गिर्राज अग्रवाल उपस्थित रहे। वर्ग का प्रतिवेदन वर्ग कार्यवाह मनमोहन किरार ने प्रस्तुत किया, जबकि आभार प्रदर्शन प्रबंध प्रमुख मनोज भदौरिया ने किया।

कार्यक्रम स्थल पर महापुरुषों के संदेशों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। उल्लेखनीय है कि मध्यभारत प्रांत घोष वर्ग 1 मई से 15 मई तक आयोजित हुआ, जिसमें प्रांत के विभिन्न जिलों से आए स्वयंसेवकों ने घोष प्रशिक्षण प्राप्त किया।