इलेक्ट्रिक कार से गुना पहुंचे केपी यादव , स्वागत से दूर रहे सिंधिया समर्थक
निगम अध्यक्ष ने गुना कलेक्ट्रेट में ली समर्थन खरीदी को लेकर बैठक
गुना।अनंत न्यूज़
मध्यप्रदेश राज्य खाद्य नागरिक आपूर्ति निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. केपी यादव का पदभार ग्रहण करने के बाद प्रथम नगर आगमन महज एक सरकारी दौरा नहीं, बल्कि एक गहरा राजनीतिक संदेश बनकर उभरा।
गुना की सड़कों पर जब डॉ. यादव खुद इलेक्ट्रिक कार चलाकर पहुंचे, तो यह साफ हो गया कि वे भारतीय जनता पार्टी के 'संगठन प्रथम' के सिद्धांत को पूरी तरह आत्मसात कर चुके हैं। राजनीति के जानकारों के लिए यह दौरा सिंधिया बनाम केपी की पुरानी प्रतिद्वंद्विता के नए कलेवर और भाजपा के 'मूल कैडर' की एकजुटता का गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से ईंधन संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की अपील की थी। डॉ. केपी यादव ने गुना आगमन के लिए इसी अपील को अपना माध्यम बनाया। एक कैबिनेट मंत्री दर्जे के पद पर होने के बावजूद, तामझाम और लग्जरी गाड़ियों के काफिले को छोड़कर खुद इलेक्ट्रिक कार चलाकर गुना पहुंचना, उनकी बदली हुई राजनीतिक छवि को दशार्ता है। यह कदम सीधे तौर पर भाजपा संगठन की उस कार्यपद्धति से मेल खाता है, जहां 'व्यक्ति' से बड़ा 'विचार' और 'अनुशासन' होता है।
पुराने भाजपाइयों का हुजूम, सिंधिया खेमे की चुप्पी
डॉ. यादव के स्वागत सत्कार में जो नजारा दिखा, वह गुना की बदलती राजनीति की तस्दीक कर रहा था। उनके स्वागत में उमड़ी भीड़ में अधिकांशत: वे चेहरे थे, जो भाजपा के पुराने और जमीनी कार्यकर्ता माने जाते हैं। यह वही तबका है जो व्यक्ति विशेष की 'निष्ठा' के बजाय 'संगठन की लाइन' पर चलने में विश्वास रखता है। दिलचस्प बात यह रही कि जहां एक ओर मूल भाजपा कार्यकतार्ओं ने डॉ. यादव को पलकों पर बिठाया, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थकों ने इस पूरे आयोजन से दूरी बनाए रखी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केपी यादव का यह शक्ति प्रदर्शन उन लोगों को सीधा जवाब था, जो क्षेत्र में आज भी व्यक्ति-केंद्रित राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं। स्वागत की कतारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि गुना में भाजपा का मूल कैडर अब केपी के नेतृत्व में संगठित महसूस कर रहा है।
प्रशासनिक बैठकों में संगठन का अनुशासन
गुना कलेक्ट्रेट में आयोजित समीक्षा बैठक में भी डॉ. यादव का अंदाज एक मंझे हुए संगठनवादी नेता जैसा रहा। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल और अन्य अधिकारियों के साथ गेहूं उपार्जन की समीक्षा करते हुए उन्होंने न केवल आंकड़ों पर बात की, बल्कि किसानों के हित को सर्वोपरि रखा। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों पर सूचना बैनर लगाए जाएं ताकि किसानों को वजन और भुगतान की स्पष्ट जानकारी हो। तौल कांटों का सत्यापन और नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश देकर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता पारदर्शिता है। उनका यह दृष्टिकोण प्रधानमंत्री के 'अंत्योदय' संकल्प को जमीन पर उतारने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
बदलती सियासत का नया अध्याय
कुल मिलाकर, डॉ. केपी यादव का यह दौरा यह सिद्ध करने में सफल रहा कि वे अब भाजपा की विचारधारा में पूरी तरह रच-बस गए हैं। इलेक्ट्रिक कार से सफर करना, सादगी का संदेश देना और संगठन के कार्यकतार्ओं के साथ घुलना-मिलना—यह सब एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा नजर आता है। यह दौरा संदेश देता है कि गुना की राजनीति में अब निष्ठा के दो ध्रुव स्पष्ट हैं: एक तरफ वह वर्ग है जो व्यक्ति विशेष के प्रति आस्था रखता है, और दूसरी तरफ डॉ. केपी यादव के साथ खड़ा वह 'संगठनवादी' वर्ग है जो मोदी-शाह की भाजपा की रीति-नीति पर चलना चाहता है। सिंधिया समर्थकों की दूरी ने भले ही विवादों को हवा दी हो, लेकिन डॉ. यादव ने अपनी सादगी और सक्रियता से फिलहाल बाजी अपने नाम कर ली है।