उधार चुकाने के बाद भी हड़प ली आदिवासी की जमीन
अनपढ़ की भूमि पर दबंगों का कब्जा, न्याय के लिए एसपी ऑफिस पहुंचा पीड़ित
गुना।अनंत न्यूज़
कर्ज के जाल में फंसाकर एक निरक्षर आदिवासी की कीमती जमीन और ट्यूबवेल हड़पने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोन थाने में कोई सुनवाई न होने से हताश होकर पीड़ित आदिवासी युवक ने जिला मुख्यालय पहुंचकर एसपी से न्याय और अपनी पैतृक भूमि वापस दिलाने की गुहार लगाई है। दबंगों ने न केवल उसकी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया है, बल्कि विरोध करने पर उसके साथ मारपीट भी की गई है।
मामला आरोन थाना क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 1 का है। यहाँ के निवासी बृजेश सहरिया पुत्र रामचरन सहरिया के पास भूदान की 5 बीघा कृषि भूमि थी। पीड़ित बृजेश के अनुसार, कुछ समय पूर्व उसने अपनी पारिवारिक आवश्यकताओं के चलते आरोन थाना क्षेत्र के ही ग्राम चिरौला निवासी लाखन मीना और राजू मीना से एक लाख रुपए उधार लिए थे। बृजेश का दावा है कि वह पूरी ईमानदारी के साथ आरोपियों को मूलधन और ब्याज मिलाकर अब तक कुल 1 लाख 10 हजार रुपए वापस भी लौटा चुका है। इसके बावजूद आरोपियों की नीयत खराब हो गई और उन्होंने रकम मिलने के बाद भी उसकी जमीन छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। जालसाजी के बाद आरोपियों ने दबंगई दिखाते हुए बृजेश की लगभग एक बीघा जमीन और उस पर लगे पानी के ट्यूबवेल पर जबरन कब्जा कर लिया। जब पीड़ित किसान ने अपनी ही जमीन पर जाने और खेती करने का प्रयास किया, तो आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया।
केसीसी का झांसा देकर दस्तावेजों पर करा लिए दस्तखत
पीड़ित बृजेश सहरिया ने एसपी को अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वह पूरी तरह अनपढ़ और सीधा-साधा है। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने उसे किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने का झांसा दिया। बैंक से लोन पास कराने के बहाने आरोपी उसे अपने साथ ले गए और कुछ सरकारी व कानूनी दस्तावेजों पर लिखा-पढ़ी कराते हुए उसके अंगूठे के निशान और दस्तखत ले लिए। चूंकि बृजेश पढ़ना-लिखना नहीं जानता था, इसलिए उसे भनक भी नहीं लगी कि केसीसी के नाम पर उसकी जमीन की हेराफेरी के कागजात तैयार कराए जा रहे हैं।
थाने में नहीं हुई सुनवाई, अब एसपी से न्याय की आस
बृजेश का आरोप है कि इस धोखाधड़ी और मारपीट की शिकायत लेकर वह सबसे पहले स्थानीय आरोन पुलिस थाने पहुंचा था। लेकिन वहां पदस्थ पुलिसकर्मियों ने उसकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई की। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से परेशान होकर आखिरकार उसे एसपी की शरण लेनी पड़ी।