नामांतरण कार्य में पटवारी की एंट्री पर नपा अध्यक्ष नाराज! कहा— परिषद या निकाय में ऐसा कोई नियम नहीं, हमसे नहीं ली गई कोई अनुमति
एसडीएम ने पटवारी सौरभ बंसल को सौंपी जिम्मेदारी, नपा में 650 से अधिक नामांतरण प्रकरण लंबित
गुना।अनंत न्यूज़
गुना नगरपालिका में लंबित करीब 650 नामांतरण प्रकरणों के भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों के परीक्षण के लिए राजस्व विभाग के पटवारी की एंट्री पर सियासत और प्रशासनिक खींचतान तेज हो गई है। इस नई व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताते हुए नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने इसे पूरी तरह नियम विरुद्ध बताया है। नपा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि हमारे पास पर्याप्त और अनुभवी स्टाफ है, ऐसे में पटवारी से जांच कराना समझ से परे और गैर-कानूनी है। इससे जनता की परेशानियां और बढ़ेंगी।
नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने कहा, हमारी राजस्व शाखा में पर्याप्त स्टाफ है और हम अब तक 4000 से अधिक नामांतरणों का निराकरण कर चुके हैं। अध्यक्ष स्तर पर एक भी प्रकरण लंबित नहीं है। जिन प्रकरणों की पेंडेंसी बताई जा रही है, वह पूर्व में प्रभारी सीएमओ रहीं डिप्टी कलेक्टर के समय की है। यदि वे समय पर काम करतीं, तो आज यह स्थिति न बनती। उनकी लापरवाही के कारण मेरी और मेरी परिषद की बदनामी हुई है। नपा अध्यक्ष ने प्रशासनिक तालमेल पर सवाल उठाते हुए कहा कि निकाय में ऐसा कोई नियम नहीं है और न ही परिषद से ऐसा कोई प्रस्ताव पास हुआ है। उन्हें जिला प्रशासन द्वारा पटवारी नियुक्त किए जाने के संबंध में न तो कोई जानकारी दी गई और न ही किसी आदेश की प्रतिलिपि मिली। उन्होंने कहा कि नपा की राजस्व शाखा में पदस्थ आरआई और आरएसआई बेहद अनुभवी हैं, जो कई निकायों में सीएमओ तक रह चुके हैं। उनके किए काम की जांच पटवारी से कराना विधि संगत नहीं है, इससे नागरिकों को अब पटवारी के चक्कर काटने पड़ेंगे।
आरआई से ऊपर हुआ कद
दरअसल, यह पूरा विवाद एसडीएम शिवानी पाठक द्वारा जारी उस आदेश के बाद शुरू हुआ है, जिसमें पटवारी हल्का नंबर 77 में पदस्थ सौरभ बंसल को वर्तमान दायित्व के साथ गुना नपा के नामांतरण कार्य की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। नवागत सीएमओ शैलेश अवस्थी की मांग पर एक माह के लिए की गई इस व्यवस्था के तहत, नपा के आरआई (राजस्व निरीक्षक) द्वारा स्वीकृत किए जा चुके प्रकरण अब अंतिम हस्ताक्षर से पहले पटवारी के पास स्क्रूटनी के लिए जाएंगे। दिलचस्प बात यह है कि तहसील में पटवारी आरआई के नीचे काम करते हैं, लेकिन नपा की इस व्यवस्था में आरआई का कद पटवारी से नीचे हो गया है।
629 फाइलें धूल खा रहीं, एक मामला 2006 से लंबित
सूत्रों के मुताबिक, नए सीएमओ शैलेश अवस्थी ने पदभार संभालते ही जब राजस्व शाखा से रिपोर्ट मांगी, तो पता चला कि सीएमओ के हस्ताक्षर के लिए कुल 629 नामांतरण प्रकरण लंबित हैं। इनमें से एक मामला तो वर्ष 2006 का है, जबकि 515 प्रकरण वर्ष 2025 और 2026 के हैं, जब नपा की कमान डिप्टी कलेक्टर मंजूषा खत्री के हाथों में थी। हालिया स्क्रूटनी के बाद यह पेंडेंसी अब 650 पार कर चुकी है। प्रॉपर्टी मालिक उम्मीद लगाए बैठे थे कि नए सीएमओ के आते ही फाइलें क्लियर होंगी, लेकिन अब पटवारी की एंट्री के बाद इन फाइलों का नए सिरे से परीक्षण होगा, जिससे काम में और देरी होना तय माना जा रहा है।