करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश उजागर!

नगरपालिका अध्यक्ष के पदनाम की फर्जी सील लगाई, उसपर लिखा था-महानगरपालिका, थाने तक पहुंचा मामला

करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश उजागर!
कैंट टीआई को आवेदन देतीं नगरपालिका अध्यक्ष।

गुना।अनंत न्यूज़

गुना जिले में फजीर्वाड़े और धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक हड़कंप मचा दिया है। शहर की प्रथम नागरिक यानी नगरपालिका अध्यक्ष के ही फर्जी हस्ताक्षर और सील का उपयोग कर करोड़ों रुपये मूल्य की शासकीय भूमि का पट्टा हासिल करने का एक बड़ा प्रयास किया गया।

इस गंभीर धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद सोमवार को खुद नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता अपने अभिभाषक मनोज श्रीवास्तव के साथ कैंट थाने पहुंचीं। उन्होंने थाना प्रभारी को एक शिकायती आवेदन सौंपकर आरोपी सत्येंद्र सिंह रघुवंशी के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने और शासकीय प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करने की विभिन्न धाराओं में तत्काल केस दर्ज (एफआईआर) करने की मांग की है। कैंट थाने में दिए गए शिकायती आवेदन के अनुसार, यह पूरा मामला आरोन तहसील के ग्राम देहरी निवासी सत्येंद्र सिंह रघुवंशी नामक व्यक्ति से जुड़ा हुआ है। आरोपी सत्येंद्र ने गुना के गोपालपुरा स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 142 (कुल रकबा 29.961 हेक्टेयर) और सर्वे क्रमांक 231 (कुल रकबा 26.9500 हेक्टेयर) की विशाल भूमि पर फलदार आम के वृक्ष लगाने के नाम पर वृक्षारोपण पट्टा प्राप्त करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में आवेदन दिया था। इस आवेदन के साथ उसने नगरपालिका अध्यक्ष की एक फर्जी अनुशंसा रिपोर्ट भी संलग्न की थी। जब इस पट्टे को लेकर एसडीएम कार्यालय स्तर पर प्रशासनिक कार्रवाई शुरू की गई, तब आरोपी की यह कूटनीति और फजीर्वाड़ा पकड़ में आया। दरअसल, शातिर आरोपी ने दस्तावेज पर जो फर्जी सील लगाई थी, उसमें अध्यक्ष, महानगरपालिका गुना अंकित था। जबकि सर्वविदित है कि गुना में नगरपालिका परिषद अस्तित्व में है, यहाँ कोई महानगरपालिका नहीं है। इस तकनीकी चूक के अलावा जब सील के ऊपर किए गए हस्ताक्षरों का मिलान किया गया, तो वे भी नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता के मूल हस्ताक्षरों से पूरी तरह भिन्न और फर्जी पाए गए। आरोपी ने इस कूटरचित दस्तावेज के सहारे इतनी बड़ी सरकारी जमीन का पट्टा अपने नाम कराने की पूरी तैयारी कर ली थी।

एसडीएम से जिला पंचायत और पटवारी तक पहुंच गई फाइल

इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपी का यह फजीर्वाड़ा शुरूआती स्तर पर पकड़ा नहीं जा सका और फाइल लगातार आगे बढ़ती रही। एसडीएम कार्यालय में फर्जी अनुशंसा पत्र जमा होने के बाद, यह आवेदन आगे की विभागीय कार्रवाई के लिए जिला पंचायत कार्यालय भेजा गया। वहाँ से यह फाइल तहसीलदार कार्यालय पहुंची और फिर तहसीलदार ने इसे मौका मुआयना व स्थलीय जांच के लिए हल्का पटवारी के पास भेज दिया। जब फाइल पटवारी स्तर पर पहुंची और उन्होंने दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल शुरू की, तब जाकर इस पूरे गंभीर घालमेल से पर्दा उठा। पटवारी स्तर पर जांच के दौरान ही यह बात सामने आई कि नपा अध्यक्ष की सील और दस्तखत फर्जी हैं। इसके बाद जब इस संबंध में नगरपालिका अध्यक्ष को अवगत कराया गया, तब जाकर उन्हें भनक लगी कि उनके नाम पर शहर में इतना बड़ा फजीर्वाड़ा चल रहा है।

राजनीतिक प्रतिद्वंदिता की आशंका

इस मामले को लेकर नगरपालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसी बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता और उन्हें बदनाम करने या फंसाने की साजिश होने की आशंका जताई है। उनका मानना है कि बिना किसी राजनीतिक शह या ऊंचे संपर्कों के कोई आम व्यक्ति सीधे शहर की प्रथम नागरिक के फर्जी दस्तावेज तैयार करने की हिम्मत नहीं कर सकता। वहीं, नपा अध्यक्ष के अभिभाषक मनोज श्रीवास्तव ने इस मामले में प्रशासनिक व्यवस्था पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कैंट पुलिस से मांग की है कि इस मामले में केवल मुख्य आरोपी सत्येंद्र सिंह रघुवंशी ही नहीं, बल्कि एसडीएम कार्यालय और जिला पंचायत सीईओ कार्यालय के उन संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका की भी सघन जांच की जानी चाहिए, जिनके टेबल से होकर यह फर्जी फाइल इतनी आसानी से आगे बढ़ गई।