दिव्यांग प्रहलाद सिंह के जीवन में बिखरी उम्मीद की नई रोशनी
जनसुनवाई में खुला आत्मनिर्भरता का द्वार
गुना।अनंत न्यूज़
जिला मुख्यालय पर आयोजित होने वाली साप्ताहिक जनसुनवाई एक बार फिर किसी जरूरतमंद के जीवन में अंधकार को चीरकर नई आशा की किरण लेकर आई है। यह कहानी केवल एक सरकारी आवेदन के निराकरण की नहीं है, बल्कि एक हौसले को टूटने से बचाने और एक दिव्यांग के आंसुओं को मुस्कान में बदलने की बेहद मार्मिक दास्तान है।
मामला तहसील मकसूदनगढ़ का है, जहाँ के निवासी दिव्यांग प्रहलाद सिंह लंबे समय से शारीरिक अक्षमताओं के बावजूद अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए खुद का कोई छोटा-मोटा रोजगार शुरू करना चाहते थे। वे किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय सम्मान से जीना चाहते थे, लेकिन नियति की मार और घोर आर्थिक अभाव उनके इस छोटे से सपने के आड़े आ रहा था। पैसों की तंगी के कारण जब उनके सारे प्रयास विफल हो गए, तो वे अपनी बची-कुची उम्मीद और भारी मन से जिला मुख्यालय पर आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे। जनसुनवाई में बैसाखियों के सहारे पहुंचे प्रहलाद सिंह ने जब अपनी व्यथा और रोजगार शुरू करने की तड़प कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के समक्ष रखी, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। कलेक्टर ने उनकी दयनीय परिस्थिति और आत्मनिर्भर बनने के जज्बे को न सिर्फ बेहद गंभीरता से सुना, बल्कि तत्परता दिखाते हुए उनके स्वावलंबन का रास्ता साफ किया। उन्होंने प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए प्रहलाद सिंह को खुद का रोजगार स्थापित करने के लिए तत्काल आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत कर प्रदान की।
चेहरे पर लौटी मुस्कान, कहा- 'अब सम्मान से जी सकूंगा'
प्रशासनिक मदद का चेक हाथ में आते ही प्रहलाद सिंह के चेहरे पर छाई मायूसी गायब हो गई और उसकी जगह गहरे आत्मविश्वास और खुशी की लहर दौड़ गई। भावुक होते हुए प्रहलाद सिंह ने कहा कि यह उनके लिए केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि डूबते को तिनके का सहारा है। अब वे समाज में किसी पर बोझ बने बिना, अपने पैरों पर खड़े होकर सम्मानपूर्वक जीवनयापन कर सकेंगे। उन्होंने भरे गले से जिला प्रशासन की इस सहृदयता के प्रति आभार व्यक्त किया।