डबल बैंच से भी नहीं मिली टीआई चंद्रप्रकाश सिंह को राहत , निलंबन बरकरार रहेगा, सुनवाई के दौरान पक्ष रख सकेंगे

डबल बैंच से भी नहीं मिली टीआई चंद्रप्रकाश सिंह को राहत , निलंबन बरकरार रहेगा, सुनवाई के दौरान पक्ष रख सकेंगे

अनंत न्यूज़ @गुना। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डबल बेंच ने गुना के कोतवाली थाना प्रभारी चंद्रप्रकाश सिंह चौहान के निलंबन और विभागीय जांच के सिंगल बेंच के आदेश को यथावत रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत सिंगल बेंच द्वारा लिया गया निर्णय पूरी तरह न्यायसंगत है और इसमें हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
विवाद की जड़ अक्टूबर महीने में कोतवाली थाने में दर्ज एक एफआईआर है। एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके अश्लील फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किए गए हैं। इस मामले में नामजद आरोपी महिला ने पहले जिला अदालत और फिर हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन दोनों ही जगहों से उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी। हैरानी की बात तब सामने आई जब कोर्ट से राहत न मिलने के बावजूद थाना प्रभारी ने आरोपी महिला को गिरफ्तार करने के बजाय महज नोटिस तामील कर छोड़ दिया। हालांकि नियमत: सात साल तक की सजा वाले मामलों में नोटिस देकर छोड़ने का प्रावधान है, लेकिन पीड़िता का आरोप था कि पुलिस जानबूझकर आरोपी को संरक्षण दे रही है और गिरफ्तारी से बच रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच के दौरान निलंबित टीआई को अपनी बेगुनाही साबित करने और अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा। सक्षम प्राधिकारी साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लेंगे। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि विभागीय जांच में अब और देरी नहीं की जाएगी।

निष्पक्ष जांच के लिए पद से हटाना जरूरी: कोर्ट
कार्रवाई से असंतुष्ट होकर पीड़ित युवती ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए सिंगल बेंच ने 30 जनवरी को सख्त रुख अपनाते हुए टीआई को निलंबित करने और उनके विरुद्ध विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ टीआई चंद्रप्रकाश सिंह ने डबल बेंच में अपील की थी, जिस पर 9 फरवरी को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। अब डबल बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा है कि जांच अधिकारी अक्सर कानून-व्यवस्था जैसे अन्य कार्यों में रुचि दिखाते हैं, लेकिन गंभीर अपराधों की जांच में ढिलाई बरतते हैं। ऐसी कार्यप्रणाली से पीड़ितों को दर-दर भटकना पड़ता है और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए अधिकारी का पद से हटना अनिवार्य है।