केयर यूनिट के हालात खुद 'क्रिटिकल'
दिव्यांग भाई को नहीं मिली व्हील चेयर, रैम्प पर फिसलने से बहन घायल
गुना।अनंत न्यूज़
जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग में लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार की गई क्रिटिकल केयर यूनिट के हालात खुद क्रिटिकल (संवेदनशील) नजर आ रहे हैं। इस नवीन यूनिट को काफी शोर-शराबे और भारी प्रचार-प्रसार के साथ यह दावा करते हुए शुरू किया गया था कि यह आधुनिक सुविधाओं से पूरी तरह लैस है। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता के कारण आज एक बार फिर मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति यह है कि गंभीर और दिव्यांग मरीजों के लिए इस तथाकथित आधुनिक अस्पताल में एक व्हील चेयर तक नसीब नहीं हो पा रही है। दरअसल, बुधवार को जाट मोहल्ला निवासी रानी बैरागी अपने दिव्यांग भाई को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आई थी। भाई की शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे व्हील चेयर की सख्त जरूरत थी। रानी जब उम्मीद लेकर क्रिटिकल केयर यूनिट में व्हील चेयर लेने पहुंची, तो वहां मौजूद स्टाफ ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय उसे पुरानी बिल्डिंग में जाकर खुद व्हील चेयर ढूंढने की सलाह दे दी। अपने बेबस दिव्यांग भाई को वहीं छोड़कर रानी बैरागी जब जिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की तरफ जा रही थी, तभी नई बिल्डिंग के चमचमाते रैम्प पर अचानक उसका पैर स्लिप हो गया। रैम्प पर पैर फिसलने से वह बुरी तरह गिर गई और उसे गंभीर चोटें आई हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं संवेदनहीनता के नजारे
जिला अस्पताल प्रबंधन की यह पहली लापरवाही नहीं है। क्रिटिकल केयर यूनिट से संबंधित इस तरह के शर्मनाक और विचलित करने वाले नजारे इससे पहले भी सामने आ चुके हैं। अभी हाल ही में एक ऐसा ही वाकया देखने को मिला था, जब एक लाचार महिला मरीज को उसके परिजन कंधे पर बैठाकर पुरानी बिल्डिंग से क्रिटिकल केयर यूनिट तक लेकर पहुंचे थे। इन लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखकर अब शहरवासी यह सवाल उठाने लगे हैं कि जिला अस्पताल का स्टाफ या तो पूरी तरह संवेदनहीन हो चुका है, या फिर कागजों पर आधुनिक दिखने वाले इस अस्पताल में असल में संसाधन ही उपलब्ध नहीं हैं। करोड़ों की लागत से बनी इस यूनिट में अगर मरीजों को स्ट्रेचर और व्हील चेयर जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही हैं, तो फिर आधुनिकता के इन बड़े-बड़े दावों का क्या औचित्य है?
कलेक्टर ने 4 दिन पहले किया था निरीक्षण और आदेश भी दिए, पर अमल नहीं
खास बात यह है कि गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल लगभग 4 दिन पहले ही जिला अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने निर्माणाधीन एमसीएच बिल्डिंग का निरीक्षण किया था और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर उन्हें हिदायत दी कि मरीजों को अच्छी सुविधाएं मिलें। इतना ही नहीं कलेक्टर ने इसी दिन कहा था कि क्रिटिकल केयर यूनिट में मरीजों को ले जाते समय झटके लगने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने रैंप एवं रेलिंग में आवश्यक सुधार करते हुए अतिरिक्त सपोर्ट एवं कार्पेट जैसी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे, ताकि मरीजों को किसी तरह की असुविधा न हो। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इसी जगह बुधवार को एक हादसा हो गया। फिलहाल जिस महिला को चोट लगी है, उसने असहनीय दर्द की शिकायत की है। महिला का कहना है कि वह अपने दिव्यांग भाई का इलाज कराने आई थी और उसे खुद असहनीय दर्द मिल गया है। अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर महिला ने खासी नाराजगी जाहिर की है।