बमौरी को आदिवासी ग्राम घोषित करने का प्रस्ताव भेजे प्रशासन राष्ट्रीय आयोग अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य का सुझाव, आदिवासियों के धर्मांतरण पर जताई चिंता

बमौरी को आदिवासी ग्राम घोषित करने का प्रस्ताव भेजे प्रशासन  राष्ट्रीय आयोग अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य का सुझाव, आदिवासियों के धर्मांतरण पर जताई चिंता

अनंत न्यूज़ @ गुना। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने अपने तीन दिवसीय गुना दौरे के दौरान मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक की और पत्रकारों से चर्चा करते हुए जिले के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अंतर सिंह आर्य ने गुना जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि जिले में लगभग 1 लाख 95 हजार की बड़ी आदिवासी आबादी को देखते हुए बमौरी को आदिवासी ग्राम घोषित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाए। उन्होंने प्रशासन को सुझाव दिया कि अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर युवाओं से सीधा संवाद करें और उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से हल करें।
पत्रकार वार्ता की शुरुआत में अपनी शालीनता का परिचय देते हुए आर्य ने एक घंटे की देरी के लिए खेद जताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश का निवासी होने के नाते मीडिया से उनका आत्मीय रिश्ता है और वे जनजाति वर्ग के संरक्षण व संवर्धन के लिए निरंतर सक्रिय हैं। आर्य ने समाज में बढ़ते धर्मांतरण के मुद्दे पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासी समाज को तोड़ने के लिए एक बड़ा षड्यंत्र चलाया जा रहा है, जिसमें सभ्यता, संस्कारों और धार्मिक परिदृश्य को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकारों की अनदेखी के कारण आदिवासियों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई थीं, लेकिन वर्तमान केंद्र सरकार एकलव्य आश्रम जैसी योजनाओं और सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों के उन्मूलन के जरिए समाज की दशा सुधार रही है। गेल और एनएफएल जैसे संस्थानों में कार्यरत जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को शासन के नियमों का लाभ दिलाने की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्थानीय प्रशासन के आपसी संवाद की सराहना की।

कोशिश करेंगे हर जगह लागू हो पेसा एक्ट


पेसा एक्ट के क्रियान्वयन पर चर्चा करते हुए अध्यक्ष ने बताया कि झारखंड और ओडिशा जैसे राज्यों में इसे लागू करवाने के लिए आयोग ने वहां के मुख्यमंत्रियों से चर्चा की है, जबकि मध्य प्रदेश में इसके जमीनी क्रियान्वयन को और अधिक मजबूत करने के लिए राज्यपाल मंगूभाई पटेल से संवाद किया गया है। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखाने में सहयोग करें ताकि वे अपने मार्ग से भटकें नहीं। अंत में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी से एक पेड़ मां के नाम लगाने का आव्हान किया और आदिवासी बच्चों के साथ अपने संवाद के अनुभवों को साझा करते हुए जिले की शैक्षणिक स्थिति पर संतोष जताया।

वन भूमि के रिजेक्ट हो चुके पट्टों पर होगा पुर्नविचार


आर्य की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय अधिकारियों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले के विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए आर्य ने स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहकर अंतिम छोर के आदिवासी व्यक्ति तक पहुंचनी चाहिए। अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य ने वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित और पूर्व में अस्वीकृत किए गए प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए उनका पुन: परीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और फसल बीमा योजना का लाभ जिले के हर पात्र जनजातीय किसान को मिलना सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, वन संरक्षण के लिए एक बगिया मां के नाम अभियान को जन-आंदोलन बनाने और तेंदूपत्ता जैसी वनोपज को संरक्षित करने पर जोर दिया।

अमरूद की खेती और नवाचारों की सराहना


बैठक में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने जिले में किए जा रहे नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बमोरी क्षेत्र में अमरूद की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे एक एकड़ में लगभग 8 लाख रुपये तक की आय की संभावनाएं विकसित हुई हैं। आयोग अध्यक्ष ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे राज्य स्तर पर विस्तारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों की सजावट और सीएम हेल्पलाइन के बेहतर प्रबंधन की भी प्रशंसा की।

संवाद से होगा समाधान


आयोग अध्यक्ष ने अधिकारियों को नसीहत देते हुए कहा कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि मैदानी स्तर पर जाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद करें। इससे वास्तविक समस्याओं को समझकर उनका प्रभावी निराकरण किया जा सकेगा। बैठक के प्रारंभ में आयोग के डिप्टी डायरेक्टर आर.के. दुबे ने आयोग की कार्यप्रणाली और संवैधानिक गठन के बारे में जानकारी दी।