मयखाने में तब्दील हो गए होटल और रेस्टोरेंट! गुना में आबकारी विभाग की बड़ी दबिश; होटल, ढाबों और सार्वजनिक स्थानों पर मदिराप्रेमियों में हड़कंप

मयखाने में तब्दील हो गए होटल और रेस्टोरेंट!  गुना में आबकारी विभाग की बड़ी दबिश; होटल, ढाबों और सार्वजनिक स्थानों पर मदिराप्रेमियों में हड़कंप
निजी होटल पर कार्रवाई करते हुए आबकारी विभाग के अधिकारी

अनंत न्यूज़ @ गुना। जिले में अवैध रूप से मदिरापान और सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने वालों के खिलाफ आबकारी विभाग ने अब अपने तेवर सख्त कर लिए हैं। कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल और ग्वालियर संभाग के उपायुक्त संदीप शर्मा के निर्देशन में जिला आबकारी अधिकारी गुरुप्रसाद केवट के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा एक बड़ी कार्यवाही को अंजाम दिया गया है। इस विशेष अभियान के तहत जिले के आधा दर्जन से अधिक सार्वजनिक स्थानों और चोरी-छिपे शराब पिलाने वाले होटल-ढाबों पर ताबड़तोड़ दबिश दी गई।
कार्यवाही की भनक लगते ही कुछ होटल संचालक मौके से फरार हो गए और परिसर सूने पाए गए, लेकिन विभाग ने कई स्थानों पर नियमों का घोर उल्लंघन पकड़ते हुए प्रकरण दर्ज किए हैं। कार्यवाही के दौरान वृत्त एवं नियंत्रण कक्ष प्रभारी राधाकिशन अटारिया की टीम ने हाईवे स्थित होटल राजपुताना, इंडस्ट्रियल एरिया के होटल शूटर व सरदारजी होटल, जज्जी बस स्टैंड, पुरानी सायकल फैक्ट्री, अंडर ब्रिज बस स्टैंड और होटल अमन जैसे प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी की। इन स्थानों पर कई नवयुवक और अन्य लोग मदिरा का सेवन करते पाए गए। प्रशासनिक सख्ती के दावों के बीच गुना शहर और आसपास के इलाकों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के कई नामी होटल और आलीशान रेस्टोरेंट अब अघोषित बार में तब्दील हो चुके हैं, जहां देर शाम होते ही शराब के जाम छलकाए जाते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि आबकारी विभाग की कार्यवाही इन रसूखदार संस्थानों तक पहुँचने के बजाय केवल चुनिंदा ठिकानों तक ही सीमित नजर आती है। विभाग की वर्तमान सक्रियता सराहनीय तो है, लेकिन यह सवाल भी उठ रहे हैं कि आखिर बड़े और रसूखदार होटल मालिकों पर हाथ डालने से विभाग क्यों हिचकिचा रहा है?

हाइवे के 'मदिरा अड्डों' पर मेहरबानी
आबकारी विभाग की सबसे ज्यादा विफलता हाइवे पर स्थित उन बड़े होटलों और ढाबों के खिलाफ दिखती है, जो अवैध रूप से शराब परोसने के मुख्य केंद्र बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाइवे के ढाबों पर रातभर महफिलें सजती हैं, लेकिन विभाग की छापामार कार्यवाही यहाँ न के बराबर होती है। वर्तमान में विभाग की कार्यवाही केवल इक्का-दुक्का होटलों तक ही सिमट कर रह गई है। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन बिना किसी दबाव के व्यापक और निष्पक्ष कार्यवाही करे, तो गुना के कई बड़े सफेदपोश होटल और रेस्टोरेंट संचालक बेनकाब होंगे जो कानून की धज्जियां उड़ाकर अवैध रूप से शराब पिलाने का धंधा कर रहे हैं।

युवाओं के भविष्य पर मंडराता खतरा
विभाग को लगातार सूचनाएं मिल रही थीं कि कई युवा होटलों और ढाबों पर शराब पीने की लत का शिकार होकर अपना भविष्य खराब कर रहे हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए जिला आबकारी अधिकारी ने त्वरित कार्यवाही और सुधार के आदेश जारी किए थे। इस अभियान के दौरान मदिरा का सेवन करने वालों और अवैध रूप से पिलाने वाले होटल संचालकों के विरुद्ध आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। मौके पर मौजूद कई लोगों को विभाग की ओर से सख्त हिदायत दी गई और उन्हें भविष्य में होने वाली दंडात्मक कार्यवाही व नशे से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक किया गया।

कलेक्टर के सख्त निर्देश: शादियों के सीजन में रहेगी 'पैनी नजर'
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थानों और होटलों पर यह चेकिंग अभियान निरंतर जारी रहेगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आगामी शादियों के सीजन को देखते हुए विशेष रूप से होटल, मैरिज गार्डन और निजी फार्म हाउस पर कड़ी नजर रखी जाएगी। विभाग का उद्देश्य है कि सामाजिक कार्यक्रमों में कानून और मयार्दा बनी रहे। जो भी संचालक अपने परिसर में अवैध रूप से शराब पिलाते या परोसते पाए जाएंगे, उनके लाइसेंस निरस्त करने के साथ-साथ कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

शराब की महफिलें और बढ़ते अपराध: विवादों का केंद्र बनते होटल
जिले के कई होटलों और रेस्टोरेंट्स में अवैध रूप से शराब पिलाने की सुविधा देना केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है। शराब के नशे में धुत होने के बाद इन स्थानों पर अक्सर मामूली बात से शुरू हुए विवाद खूनी संघर्ष में बदल जाते हैं। आए दिन इन होटलों में गाली-गलौज, मारपीट और तोड़फोड़ की खबरें सामने आती हैं। शराब की मौजूदगी की वजह से अपराधी तत्व भी इन जगहों पर सक्रिय रहते हैं, जिससे आम परिवारों का इन रेस्टोरेंट्स में जाना दूभर हो गया है। कई बार तो नौबत गंभीर मारपीट और पुलिस केस तक पहुँच जाती है, जिसका मुख्य कारण परिसर के भीतर अवैध मदिरापान ही होता है।