म्याना अस्पताल की बदहाली का खुला कच्चा चिट्ठा

जब पड़ताल करने पहुँचे कांग्रेसी तो डॉक्टरों ने ही सुना दी अपनी व्यथा

म्याना अस्पताल की बदहाली का खुला कच्चा चिट्ठा
म्याना अस्पताल में अव्यवस्थाओं की पड़ताल करने पहुंचे कांग्रेसी।

गुना/म्याना। जिले के स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल उस समय खुल गई जब म्याना शासकीय अस्पताल में फैली अव्यवस्थाओं का मुद्दा सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक गूँज उठा। पिछले 48 घंटों में हुई दो गंभीर घटनाओं ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर जो सवालिया निशान लगाए, उसके बाद राजनीति भी गरमा गई है। स्थानीय विधायक ऋषि अग्रवाल के कड़े निर्देश पर म्याना कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अभय व्यास अपने साथियों के साथ अस्पताल की जमीनी हकीकत जानने (ग्राउंड जीरो) पहुँचे। लेकिन यहाँ जो मंजर दिखा, उसने प्रशासन की गंभीरता को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

 कमियां तलाशने गया दल, मिलीं समस्याओं की ढेर सारी 'फाइलें'

अक्सर देखा जाता है कि जब कोई राजनीतिक दल निरीक्षण पर पहुँचता है, तो अधिकारी बचाव की मुद्रा में आ जाते हैं। लेकिन म्याना अस्पताल में स्थिति इसके ठीक उलट रही। ब्लॉक अध्यक्ष अभय व्यास के नेतृत्व में जब कांग्रेसी दल अस्पताल की कमियां तलाशने पहुँचा, तो वहाँ तैनात चिकित्सकों ने स्वयं ही अपनी लाचारी और समस्याओं की एक लंबी फेहरिस्त गिना दी। डॉक्टरों ने बेबाकी से स्वीकार किया कि वे सीमित संसाधनों के चलते मरीजों को उचित उपचार देने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं।

 नेशनल हाईवे पर अस्पताल, लेकिन एंबुलेंस का अता-पता नहीं

निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला खुलासा 'एंबुलेंस' को लेकर हुआ। चिकित्सकों ने बताया कि म्याना जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण केंद्र पर, जो सीधे नेशनल हाईवे से जुड़ा है, वहाँ एक भी 'परमानेंट एंबुलेंस' उपलब्ध नहीं है। अस्पताल पूरी तरह से '108' सेवा के भरोसे चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कई बार कॉल करने के बावजूद 108 एंबुलेंस समय पर नहीं पहुँच पाती, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। नेशनल हाईवे पर लगातार होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए यहाँ स्थाई एंबुलेंस की अनुपलब्धता प्रशासन की बड़ी लापरवाही मानी जा रही है।

 विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना 'बीमार' है अस्पताल

 अस्पताल की पड़ताल में यह भी सामने आया कि यहाँ एमडी (फिजिशियन) और महिला चिकित्सक जैसे महत्वपूर्ण पद स्थाई रूप से रिक्त हैं। महिला मरीजों को प्रसव या अन्य आकस्मिक समस्याओं के लिए शहर या जिला मुख्यालय की ओर दौड़ना पड़ता है। ब्लॉक अध्यक्ष अभय व्यास ने मौके से ही विधायक ऋषि अग्रवाल को फोन कर अवगत कराया कि अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है, जिसके कारण क्षेत्रीय जनता को निजी क्लीनिकों या झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा है।

 बीते दो दिनों का 'खौफनाक' घटनाक्रम

 अस्पताल की इस बदहाली को प्रमाणित करने के लिए बीते दो दिनों की घटनाएं काफी हैं:

21 फरवरी की घटना: एक बेसुध महिला को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। परिजनों के बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उसे एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिली, जिसके चलते परिजनों ने जमकर आक्रोश जताया था।

 22 फरवरी (रविवार) की घटना: अटलपुर निवासी 28 वर्षीय युवक देवेंद्र धाकड़ सड़क हादसे में गंभीर घायल होकर अस्पताल पहुँचा। लेकिन म्याना अस्पताल में उसे प्राथमिक उपचार तक मयस्सर नहीं हुआ और करीब एक घंटे तक वह घायल अवस्था में वहीं पड़ा तड़पता रहा।

 इन दोनों ही मामलों पर अस्पताल के चिकित्सकों ने गहरा खेद जताया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ दिया कि जब तक संसाधन और स्टाफ नहीं बढ़ेंगे, तब तक ऐसी चुनौतियां और देरी होना अनिवार्य है।

कांग्रेस की चेतावनी: व्यवस्था सुधारें या आंदोलन को तैयार रहें ब्लॉक अध्यक्ष अभय व्यास ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस अस्पताल को जीवनदान देना चाहिए, वह खुद संसाधनों के अभाव में दम तोड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जल्द ही म्याना अस्पताल में स्थाई एंबुलेंस, एमडी डॉक्टर और महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करेगी। फिलहाल, इस निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और जनता की नजरें अब आगामी प्रशासनिक सुधारों पर टिकी हैं।

 म्याना अस्पताल में एक घंटे तक तड़पता रहा देवेंद्र, नहीं मिला उपचार

 म्याना थाना अंतर्गत नेशनल हाईवे चौक चूल्हा के पास रविवार दोपहर एक दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया, जिसमें अटलपुर निवासी 28 वर्षीय युवक देवेंद्र धाकड़ गंभीर रूप से घायल हो गया। जानकारी सामने आई कि देवेंद्र अपनी फसल की कटाई के लिए लेबर लेने म्याना आया था। दोपहर करीब 1 बजे जब वह काम निपटाकर वापस अपने घर लौट रहा था, तभी उसकी मोटरसाइकिल अनियंत्रित होकर सड़क किनारे रखे एक ठेले से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि देवेंद्र लहूलुहान होकर सड़क पर ही गिर पड़ा। हादसे के बाद काफी देर तक युवक की पहचान नहीं हो सकी, जिसके चलते स्थानीय लोगों ने शिनाख्त के लिए सोशल मीडिया पर उसका वीडियो वायरल किया। वीडियो देखकर परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे और घायल देवेंद्र को म्याना उप स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालांकि, एक बार फिर म्याना अस्पताल की बदहाली और लापरवाही उजागर हुई। परिजनों का आरोप है कि करीब एक घंटे तक देवेंद्र घायल अवस्था में अस्पताल में पड़ा तड़पता रहा, लेकिन उसे न तो प्राथमिक उपचार मिला और न ही वहां डॉक्टर मौजूद थे। अंतत: एंबुलेंस चालक भरत रघुवंशी की तत्परता से उसे जिला अस्पताल गुना लाया गया। जिला अस्पताल में युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल भोपाल रेफर कर दिया है।