छात्रों का भविष्य अधर में : एनएसयूआई के बाद अब डीएसओ ने खोला मोर्चा ; परीक्षा से एक दिन पहले विश्वविद्यालय ने निरस्त किए परीक्षा फ़ार्म
अनंत न्यूज़ @ गुना। क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय की बड़ी लापरवाही के चलते मनोविज्ञान, माइक्रोबायोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे विषयों के सैकड़ों छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने परीक्षा से महज एक दिन पहले इन विषयों के प्राइवेट परीक्षा आवेदन निरस्त कर छात्रों को परीक्षा से वंचित कर दिया है।
इस अजब-गजब कारनामे के विरोध में बीते दो दिनों से एनएसयूआई ने विश्वविद्यालय के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। अब शुक्रवार को छात्र संगठन एआईडीएसओ ने भी कुलपति को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। यदि इन विषयों में प्राइवेट फॉर्म भरने का प्रावधान नहीं था, तो विश्वविद्यालय ने पोर्टल पर इसकी लिंक क्यों खोली और छात्रों से भारी-भरकम फीस क्यों वसूली गई? शुक्रवार को विश्वविद्यालय के नाम दिए गए ज्ञापन में संगठन के पदाधिकारी शुभम राव ने आरोप लगाया कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद से छात्रों को लगातार प्रयोग की वस्तु समझा जा रहा है, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से पिस रहे हैं। छात्र संगठन ने मांग की है कि प्रभावित विद्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित कर उन्हें साल बचाने का मौका दिया जाए और इस पूरी घटना की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही छात्रों की परीक्षा फीस तुरंत वापस करने और भविष्य में ऐसी विसंगतियों को रोकने के लिए प्रत्येक महाविद्यालय में 'यूनिवर्सिटी हेल्प डेस्क' खोलने की मांग की गई है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने जल्द ही इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया और रिक्त शैक्षणिक पदों पर भर्ती नहीं की, तो छात्र पढ़ाई छोड़ने पर मजबूर हो जाएंगे और इसके लिए सीधे तौर पर प्रशासन जिम्मेदार होगा।